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तड़का: मार रही महंगाई

कविता श्रीवास्तव

देश में सोना चांदी की बात छोड़िए अब तो राशन, तेल, सब्जी, दूध हर चीज के दाम बढ़ते जा रहे हैं। सामान्य मध्यम वर्ग और गरीबों को अब घर की रसोई चलाना भारी पड़ने लगा है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने दुनियाभर में हो रही आर्थिक अनिश्चितताओं, महंगाई के दबाव, विश्व में जारी तनाव और संभावित जोखिमों को लेकर कई संकेत दिए हैं। इन चेतावनियों का सीधा असर महीने की कमाई से घर खर्च चलाने वालों पर पड़ता है। वह वर्ग जिसकी आय सीमित है और जिसका घरेलू बजट पहले से ही दबाव में रहता है। अमीर और उच्च आय वर्ग के लोगों के पास भरपूर संसाधन होते हैं, जिससे उन्हें महंगाई से कोई फर्क नहीं पड़ता है। सामान्य मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए थोड़ीसी महंगाई भी पूरे बजट को बिगाड़ देती है। देश में आज लगभग ८० करोड़ लोग मुफ्त या अत्यधिक रियायती दरों पर खाद्यान्न प्राप्त कर रहे हैं। यह संख्या बताती है कि देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा आज भी सरकारी रेवड़ी पर निर्भर है। यानी करोड़ों परिवार ऐसे हैं, जिनके लिए राशन की दुकान से मिलने वाला अनाज उनके जीवन का आधार है। यदि इन परिवारों की आय में थोड़ी भी कमी आती है या महंगाई बढ़ती है तो सबसे पहले उनकी रसोई प्रभावित होती है। हाल के महीनों में खाद्य पदार्थों, ईंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा हर चीज के बढ़े हुए दाम आम परिवारों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और मौसम संबंधी संकट भविष्य में महंगाई का दबाव फिर बढ़ा सकते हैं। सवाल यह नहीं है कि संकट आएगा या नहीं, संकट यह है कि यदि कोई आर्थिक झटका आता है तो प्रभावित होने वाला परिवार उसके लिए कितना तैयार है। महंगाई के संभावित संकट को समझें तो हर परिवार को आपातकालीन निधि बचाकर रखनी होगी। अनावश्यक और दिखावटी खर्च और खर्चीली जीवनशैली से बचना होगा। रोजगार का अभाव है। ऐसे में युवाओं को अतिरिक्त कौशल सीखकर आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने पर फोकस करने की जरूरत है।

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