मुख्यपृष्ठसमाचारपर्यावरण को बचाने के लिए एक हुआ देश...‘अल्बानिया बिकाऊ नहीं है!'

पर्यावरण को बचाने के लिए एक हुआ देश…‘अल्बानिया बिकाऊ नहीं है!’

मनमोहन सिंह

नारेबाजी की गूंज, हाथों में लहराती तख्तियां, आंखों में गुस्सा और हवा में तैरता भारी आक्रोश… अल्बानिया के खूबसूरत नीले तटों पर इस वक्त कुदरत और कंक्रीट के बीच एक भयानक जंग छिड़ चुकी है! सड़कों पर उतरे सैकड़ों लोगों के चेहरों पर बगावत है और जुबान पर सिर्फ एक ही गगनभेदी नारा, ‘अल्बानिया बिकाऊ नहीं है!’ यह कोई मामूली विरोध प्रदर्शन नहीं है। यह अल्बानिया की आत्मा को बचाने की पुकार है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद, जारेड कुशनर के अरबों डॉलर के आलीशान रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ उठी है। इस प्रोजेक्ट ने देश की सियासत और पर्यावरण में एक ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसकी कड़वाहट पूरे यूरोप में महसूस की जा रही है।
कुदरत के सीने पर कंक्रीट का खंजर?
जारेड कुशनर की इन्वेस्टमेंट फर्म ‘अफिनिटी पार्टनर्स’ अल्बानिया के दक्षिणी तट पर स्थित वजोरा शहर के पास एक बेहद खूबसूरत और अछूते द्वीप पर आलीशान विला, वीआईपी होटल और रिसॉर्ट बनाने की तैयारी में है। पहली बड़ी चिंता यह है कि यह प्रोजेक्ट वजोसा-नार्टा लैगून के मुहाने पर बनने जा रहा है। यह इलाका कोई आम जमीन नहीं, बल्कि एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित वेटलैंड है। दूसरी बड़ी बात यह है कि हर साल यहां दुनिया के कोने-कोने से हजारों प्रवासी पक्षी, खासकर गुलाबी ‘फ्लेमिंगो’ (राजहंस) और दुर्लभ पेलिकन अपना घर बनाने आते हैं। पर्यावरणविदों की चीखें गवाह हैं कि अगर यहां क्रेन और बुलडोजर चले, तो इन मासूम परिंदों की जन्नत हमेशा के लिए कंक्रीट के मलबे में दफन हो जाएगी।
पूंजीपतियों के आगे घुटने टेकती सरकार
आंदोलनकारियों का सीधा और तीखा आरोप है कि सरकार चंद डॉलरों और विदेशी निवेश की चमक में अंधी हो चुकी है। वह देश की बेशकीमती प्राकृतिक धरोहर को बड़े विदेशी बिजनेसमैन के हाथों कौड़ियों के दाम बेच रही है। स्थानीय मछुआरों और ग्रामीणों के दिलों में खौफ है कि इस वीआईपी प्रोजेक्ट के आते ही उन्हें अपनी ही पुश्तैनी जमीनों और समंदर से बेदखल कर दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह विकास नहीं, बल्कि हमारी प्रकृति और पहचान पर सीधा हमला है। हम अमीरों की अय्याशी के लिए अपनी धरती की बलि नहीं चढ़ने देंगे!
सरकार की दलील
दूसरी तरफ, अल्बानिया के प्रधानमंत्री एदी रामा और उनकी सरकार इस मेगा प्रोजेक्ट के बचाव में एक मजबूत ढाल बनकर खड़ी है। सरकार की अपनी दलीलें हैं कि इस हाई-एंड टूरिज्म प्रोजेक्ट से अल्बानिया दुनिया के सबसे अमीर पर्यटकों की पहली पसंद बन जाएगा। इससे देश की कमजोर अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए हजारों नौकरियों के दरवाजे खुलेंगे। साथ ही सरकार का दावा है कि वे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना, बेहद ‘इको-प्रâेंडली’ तरीके से निर्माण करवाएंगे।
क्या झुकेगी सत्ता या थमेगा आंदोलन?
अल्बानिया की हसीन वादियों में इस वक्त एक तरफ आधुनिक लग्जरी का चमचमाता सपना है, तो दूसरी तरफ अपनी मिट्टी और पर्यावरण को बचाने की जिद। विकास की इस अंधी दौड़ और जनता के इस चौतरफा आक्रोश के बीच, कुशनर का यह ड्रीम प्रोजेक्ट अब एक बहुत बड़े अंतर्राष्ट्रीय और कूटनीतिक दंगल में तब्दील हो चुका है। देखना होगा कि जीत कुदरत की होती है या कंक्रीट की!

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