-२४ घंटे में ही मृणालताई गोरे फ्लाईओवर पर सवालों की बौछार!
-२४८ करोड़ की परियोजना की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
जेदवी / मुंबई
गोरेगांव स्थित मृणालताई गोरे फ्लाईओवर का उद्घाटन हुए अभी २४ घंटे भी नहीं बीते थे कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना विवादों के घेरे में आ गई। करीब २४८ करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ७५० मीटर लंबे इस फ्लाईओवर की गुणवत्ता को लेकर नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए कई वीडियो में फ्लाईओवर की सड़क सतह असमान और ऊबड़-खाबड़ दिखाई दे रही है। उद्घाटन के तुरंत बाद सामने आई इन तस्वीरों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संदेह पैदा कर दिया है। नागरिकों का सवाल है कि जब परियोजना पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं, तो शुरुआत में ही ऐसी स्थिति क्यों दिखाई दे रही है?
विपक्षी नेताओं ने इसे घटिया निर्माण का उदाहरण बताते हुए संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका आरोप है कि भारी-भरकम बजट खर्च होने के बावजूद यदि नई सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, तो यह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। वहीं कई नागरिकों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। हालांकि, बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
बीएमसी अधिकारियों का दावा है कि फ्लाईओवर का निर्माण सभी निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया है और उसमें किसी प्रकार की खामी नहीं है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे वीडियो भ्रामक हैं।
गौरतलब है कि इस परियोजना को पूरा होने में करीब आठ वर्ष लगे। शुरुआती अनुमानित लागत १७०.८२ करोड़ रुपए थी, जो बढ़कर २४७.९७ करोड़ रुपए तक पहुंच गई। परियोजना में हुई देरी और लागत में भारी बढ़ोतरी को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि बढ़ते विवाद और जनाक्रोश के बीच फ्लाईओवर की गुणवत्ता को लेकर कोई स्वतंत्र जांच कराई जाती है या नहीं। साथ ही यह भी देखना होगा कि बीएमसी जनता द्वारा उठाए जा रहे सवालों का किस तरह जवाब देती है और विवाद पर पूर्णविराम लगाने के लिए क्या कदम उठाती है।
