मुख्यपृष्ठस्तंभसटायर : ना कैसे कहें

सटायर : ना कैसे कहें

डॉ. रवीन्द्र कुमार

ऐसी एक लोकप्रिय कहावत है “अगर कोई भद्र महिला ‘ना’ कहती है, तो उसका मतलब होता है ‘शायद’, अगर वह शायद कहती है, तो इसका अर्थ होता है ‘हां’ और अगर वह हां कहती है, तो वह भद्र महिला है ही नहीं। यदि कोई राजदूत (डिप्लोमैट) हां कहता है, तो इसका मतलब है शायद, अगर वह शायद कहता है तो इसका मतलब होता है नहीं और अगर वह नहीं कहता है, तो वह राजदूत है ही नहीं ” आप क्यों कि राजदूत (डिप्लोमैट) नहीं हैं। अत: आईये हम अपने दौर की एक बड़ी समस्या पर ध्यान दें कि गैर-अपमानजनक और सुखद तरीके से ‘ना’ कैसे कहें। हम खुद को कई बार एक ऐसे गतिरोध, मानसिक, सामाजिक दबाव में पाते हैं, जहां हमारा एकमात्र जवाब ‘ना’ होना चाहिये फिर भी हम संकोच करते हैं, परिणामों की शंका/ आशंका हमारी दृष्टि धुंधला देती है, हमारे निर्णय को बदल देती है और हमारी जीभ को अकड़ा देती है। वास्तव में, यह आपकी गलती नहीं है, हम सभी एक ऐसे वातावरण के पले बढ़े हैं जहां सकारात्मकता सर्वोच्च हुआ करती थी। सामाजिक रूप से हम हां / हां जी वाली संस्कृति के हैं।
आइए हम उन स्थितियों पर चर्चा करें जहां आप केवल एक ही जवाब ‘ना’ देना चाहते हैं। वह एक मुखर उत्तर है, फिर भी आपको ‘ना’ कहना वह भी पॉइंट ब्लैंक रेंज से कहना बहुत मुश्किल लगता है। यहां उन तरीकों की चर्चा करेंगे जिनसे आप सामने वाले को इस तरह ना कह सकें, जिससे दोनों का सम्मान बना रहे। कमसेकम आपका तो जरुर ही बना रहे कारण आपके लिए सम्मान से और भी अधिक दांव पर होता है। आपकी रेपुटेशन, आपकी जाॅब-सिक्युरिटी, आपके लिये ना कहने के कुछ सुझाव हैं, जिनका सहारा ले आप थोड़े सुविधाजनक तरीके से ‘ना’ कह सकते हैं:
1. पहली बार में ही ‘फेवर’ चाहने वालों को ‘ऑब्लाइज़’ न करें। फोन स्क्रीन पर उनका नाम देखकर ही आप जानते हैं कि यह कोई न कोई काम के लिए होगा। इसलिए समय लें, बाद में आप वापस कॉल कर सकते हैं यदि वह व्यक्ति महत्वपूर्ण है या फिर इसे एक अच्छा छुटकारा मान फोन न ही करें।
2. हमेशा यह कहने की आदत डालें ‘मुझे देखने दें’, ‘मैं वहाँ एक व्यक्ति को पहले जानता था, वह अब वहां नहीं है, स्थानांतरित हो गया है’।
3. “अगर मैं कहूंगा तो ये सुनिश्चित जानें कि काम नहीं होगा, मेरे उसके साथ अच्छे संबंध नहीं है आजकल। बेहतर तो ये होगा कि उस पर कोई दबाव ना ही डालें। इसका कोई फायदा नहीं होगा और काम नहीं होगा पक्का समझें”।
4. “ओह! यह हमारे हाथ में था लेकिन अब नहीं, पिछले महीने ही इस कार्य को, इन शक्तियों को मुख्यालय/अलग कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया है”।
5. ‘मैंने पहले ही इसके लिए किसी और के लिए बात/अनुशंसा कर चुका हूं। अगर आपने मुझे पिछले हफ्ते कहा होता तो मैं निश्चित रूप से कुछ मदद कर सकता था”।
6. “मुझे देखने दो मैं क्या कर सकता हूं, वैसे आप देर से आए हैं”
7. “इस केस के लिए किसी भी सिफारिश का मतलब है निश्चित रूप से अस्वीकृति, अगर आप अभी भी चाहते हैं कि मैं बोलूं तो मैं करूंगा, लेकिन मैंने सोचा कि एक दोस्त होने के नाते मुझे आपको ये बात बता देनी चाहिए”।
8. “मैं इसमें पार्टी नहीं हो सकता; मुझे बहुत खेद है कि पहली बार (भले ही यह 100वीं बार हो) आपने कोई काम बताया और मैं कर नहीं पा रहा हूं। क्यों? जब हम मिलेंगे तो मैं बाद में समझाऊंगा। फोन पर नहीं बता सकता”।
9. “क्षमा करें! काश मैं आपकी मदद कर पाता, वर्तमान में यह संभव नहीं है”
10. “मैं ऐसा कर सकता हूं, लेकिन यह मुझे बहुत महंगा पड़ेगा। मेरा तबादला भी हो सकता है। (मैं एक ऐसे अधिकारी को जानता हूं जो कहता था कि मेरा वेतन पांच अंकों में है आपके मामूली वेतन से कहीं अधिक है अब आपके इतने से वेतन के लिये मैं अपनी पांच अंकों की नौकरी पर खतरा नहीं लेना चाहता। अब टाइम बदल गया है”)।
11. “हमारे दफ्तर के फोन टैप किये जा रहे हैं इसलिए कृपया ऐसा अनुरोध न करें मैं नहीं चाहता कि आपके फोन की वजह से या मुझसे बस बात करने की वजह से आप किसी भी परेशानी में पड़ें। ना आप ये चाहेंगे कि मुझे कोई परेशानी हो”।
12. “मैं कह दूंगा पर काम की गारंटी नहीं है”।
13. “बेहतर होगा आप श्री रामलाल से मिलें। संभवत: वह इसमें आपकी मदद कर पाये। आपके मिलने के बाद मैं भी उसे बोलने की कोशिश करुंगा”।
14. “संभव नहीं है इस केस में वे ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार/योग्यता/वरिष्ठता के नियम का सख्ती से पालन करते हैं”।
15. “यह काम तो पहले ही पिछले सप्ताह/कल शाम फाइनल हो गया है”
16. कुछ लोग दूसरे के काम को अपना काम बता कर या अपने निकटतम संबधी /मित्र का काम बता उससे आपके नाम से सौदा कर लेते हैं। अत: उस मित्र/संबधी को साथ बुला कर साफ साफ मना कर दें।
17. कुछ लोग अपने दोस्तों/संबधियों में आपके नाम से रौब जमाने को फोन पर काम बताने लगते हैं उनको साफ कह दें यह कतई संभव नहीं है।
18. पहले वाक्य में ही कोशिश करके ना कह दें।
19. बता दें कि “आजकल के ‘ऑन-लाइन’ और आर. टी.आई. के जमाने में मैं ही क्या कोई भी रिस्क नहीं लेगा”।
20. जो फोन पर आपको काम बता/आपको काम पर लगा खुद मज़े लेते हैं या सोचते हैं कैसे आसानी से काम बन गया/बन जाता है। उन्हें भी काम पर लगा दिया करें। कहें कि “आप ये सब ‘फैक्स’ से भेजें। पूरे कागजात और आधार कार्ड/पैन कार्ड के साथ”। कभी-कभी उनसे कहें “इसके लिये आपको दफ्तर आना होगा, रजिस्टर पर कुछ एन्ट्रीज़ भरनी होंगी”। और कुछ नहीं तो कहें “आप एक बार मुझे फलां दिन रिमाइंड करा देना”। तब की तब देखी जायेगी न रिमाइंड करे तो आपको करना ही नहीं है।
हिंदी में कहावत है “सखी से सूम भला, जो तुरत दे जवाब” अर्थात उस धनी मित्र से (जो टालमटोल करता है) कहीं अच्छा है कंजूस मित्र जो हाथ के हाथ तुरन्त ना कर देता है। किस्सा खत्म।
एक जोक है- जब एक आदमी अपने दोस्त से मिलने गया तो वह अपनी टीनेज बेटी को पढ़ाने में व्यस्त था, उसने अपने दोस्त से पूछा तो दोस्त ने कहा, “मेरी बेटी वर्ल्ड टूर पर जा रही है, मैं उसे विश्व की भाषाएँ सिखा रहा हूं”, हैरान दोस्त ने कहा “लेकिन यह दुनिया की तमाम भाषाओं को सीखना तो बहुत कठिन काम होगा और वक्त भी बहुत लगेगा आदमी ने जवाब दिया “नहीं मैं सिर्फ अलग-अलग भाषाओं में ‘ना’ कहना सिखा रहा हूं।”

अन्य समाचार