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कहानी अनकही: जमीन से आसमान तक

सना खान

जोया एक छोटे से शहर में रहने वाली साधारण लड़की थी, लेकिन उसके सपने साधारण नहीं थे। हर शाम वह अपने घर की छत पर जाकर आसमान को देखा करती और तारों को निहारते हुए सोचती- ‘क्या कभी मेरा नाम भी इन तारों की तरह चमकेगा?’
घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। पिता की नौकरी छूट चुकी थी और मां सिलाई करके घर का खर्च चलाने में मदद करती थीं। कई बार हालात इतने कठिन हो जाते कि जरूरतों और सपनों में से किसी एक को चुनना पड़ता। लेकिन जोया ने कभी हार मानना नहीं सीखा था। वह दिन में पढ़ाई करती, शाम को बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती और रात को अपने लक्ष्य के लिए मेहनत करती। लोग अक्सर उसका मजाक उड़ाते। ‘इतने बड़े सपने मत देखा करो। तुमसे नहीं होगा।’
वह सब सुनती, लेकिन जवाब नहीं देती। उसने तय कर लिया था कि उसके जवाब उसकी मेहनत देगी। समय बीतता गया। जोया ने एक प्रतिष्ठित परीक्षा की तैयारी शुरू की। उसे पूरा विश्वास था कि इस बार वह सफल होगी। लेकिन परिणाम आया और वह असफल हो गई। उस दिन उसका हौसला टूट गया। उसे लगा शायद लोग सही कहते थे। शायद वह अपने सपनों से बहुत दूर है। रात को वह चुपचाप छत पर जाकर बैठ गई। आसमान में वही तारे थे, लेकिन आज उनमें उसे कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही थी। तभी उसकी मां उसके पास आईं और बोलीं- ‘हारने वाले वो नहीं होते जो गिर जाते हैं, हारने वाले वो होते हैं जो उठना छोड़ देते हैं।’ मां की बात उसके दिल में उतर गई।
अगले दिन उसने फिर से शुरुआत की। इस बार वह पहले से ज्यादा मजबूत थी। उसने अपनी गलतियों को समझा, खुद को बेहतर बनाया और पूरे विश्वास के साथ आगे बढ़ी।
एक साल बाद परिणाम घोषित हुआ।
इस बार उसका नाम सफल उम्मीदवारों की सूची में था। उसकी आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। वह दौड़कर मां के पास गई। मां ने उसे गले लगा लिया। वर्षों की मेहनत, संघर्ष और उम्मीद उस एक पल में सिमट गए थे। कुछ दिनों बाद स्थानीय अखबार में उसकी तस्वीर छपी। जो लोग कभी उसके सपनों पर हंसते थे, वही लोग अब उसकी तारीफ कर रहे थे।
उस शाम जोया फिर छत पर गई। आसमान में वही तारे थे, लेकिन आज वह उन्हें खोज नहीं रही थी। क्योंकि जिस सपने को वह कभी आसमान में ढूंढती थी, वह आज उसकी अपनी पहचान बन चुका था। उसे समझ आ गया था कि सपने देखने वाले बहुत होते हैं, लेकिन उन्हें सच वही करते हैं जो मुश्किलों के बावजूद चलते रहते हैं। क्योंकि मंजिल तक पहुंचने का सफर ही इंसान को जमीन से उठाकर आसमान तक ले जाता है।
हौसलों के आगे मुश्किलें झुक जाती हैं,
मेहनत की राहें मंजिल तक पहुंच जाती हैं।
जो खुद पर यकीन करना नहीं छोड़ते,
उनकी कहानियां इतिहास बन जाती हैं।

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