मुख्यपृष्ठनए समाचारबेस्ट के ४०० कर्मचारियों का डायबटीज हुआ खत्म, दवाइयां बंद

बेस्ट के ४०० कर्मचारियों का डायबटीज हुआ खत्म, दवाइयां बंद

-प्रशांत इंदप की पहल से बचे लाखों रुपए
-शिवसेना के नितिन नांदगांवकर ने किया सम्मानित
-दवाओं का खर्च ९० प्रतिशत हुआ कम

सामना संवाददाता / मुंबई
आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए जिस तरह आय बढ़ाना जरूरी है, उसी तरह आय से होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस सोच को बेस्ट उपक्रम के चिकित्सा विभाग के तकनीशियन प्रशांत इंदप ने अपने नियमित दायित्व से आगे बढ़कर काम करते हुए साबित किया है। उनकी पहल और कुशल कार्यप्रणाली से बेस्ट उपक्रम को लाखों रुपए की बचत हुई है।
कर्मचारियों में मधुमेह के बढ़ते मामलों को देखते हुए चिकित्सा विभाग ने पिछले चार वर्षों से मधुमेह परिवर्तन केंद्र शुरू किया है। इस केंद्र की जिम्मेदारी प्रशांत इंदप अपने नियमित काम के साथ संभाल रहे हैं।
इंदप के प्रयासों का परिणाम यह रहा कि ४०० कर्मचारियों की मधुमेह की दवाइयां पूरी तरह बंद हो गईं, जबकि ५०० कर्मचारियों की दवाइयों की मात्रा आधी हो गई। इसके चलते बेस्ट उपक्रम के मधुमेह की दवाइयों पर होने वाले खर्च में भारी कमी आई है। प्रशांत के काम को देखते हुए बेस्ट दिवस के अवसर पर उन्हें शिवसेना पदाधिकारी व बेस्ट कमेटी सदस्य नितिन नांदगांवकर द्वारा सम्मानित किया गया। नांदगांवकर ने कहा कि प्रशांत बेस्ट ही नहीं बल्कि समाज में आदर्श हैं। इनके बेहतर कार्य और बेस्ट के हेल्थ विभाग के प्रमुख अनिल सिंघल को बेहतर कार्य के लिए हमारी शुभेक्षा है।
बेस्ट में दवाओं की खरीद का खर्च हुआ कम
इस बारे में अनिल सिंघल ने बताया कि मधुमेह के कारण कर्मचारियों द्वारा ली जाने वाली भरपाई वाली चिकित्सकीय छुट्टियों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इससे कर्मचारियों के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ बेस्ट उपक्रम पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को भी कम करने में मदद मिली है। उन्होंने बताया कि मधुमेह की दवाइयों की खरीद पर होने वाला खर्च पहले करीब २५ लाख रुपए था, जो अब घटकर मात्र ३ लाख रुपए रह गया है। इसी तरह हृदय रोगों के उपचार पर होने वाला खर्च भी ४० लाख रुपए से घटकर १० लाख रुपए हो गया है।

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