मुख्यपृष्ठधर्म विशेषरूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि

शीतल अवस्थी

कर्म से जुड़ी शास्त्रों की सीखों पर भी व्यावहारिक नजरिए से गौर करें तो यह सार निकलकर आता है कि उम्र के एक पड़ाव पर परिवार हो या कार्यक्षेत्र हर जगह पैर जमाकर ही सुखी व सफल जीवन सुनिश्चित किया जा सकता है। वहीं, धार्मिक परंपराओं में ऐसी मानसिक शक्ति बटोरने के लिए देवी भक्ति, खासतौर पर दुर्गासप्तशती के मंगलकारी मंत्रों को बोलना बड़ा ही अचूक उपाय माना गया है। ये मंत्र सुख-समृद्धि के साथ सौभाग्य बरसाने वाले भी माने गए हैं।
दुर्गा सप्तशती का पाठ घर या देवालय में नियम व श्रद्वा से किया जा सकता है। इस पूजा के पूर्व शौचादि क्रियाओं को विविधत ढंग से कर स्नानादि द्वारा पवित्र हो, शुद्ध धुले हुए वस्त्रों को धारण कर शुद्ध आसन में असीन हो, मन में किसी प्रकार की कुंठा व ईर्ष्या, द्वेष, आशंका, क्रोध न हो तथा सदाचार, सत्य वचन, दया, क्षमा व कायिक, वाचिक, मानसिक श्रद्धा से परिपूर्ण होकर पूजा की शुरुआत की जाए तो निश्चित रूप से मां जगदम्बा मनोवांछित फल श्रद्धालु भक्त को प्रदान करती हैं। अगर आप भी पैसों की जरूरत को पूरी करना चाहते हैं, घर-परिवार में खुशहाली चाहते हैं या फिर कार्यक्षेत्र में तरक्की चाहते हैं तो जानिए देवी पूजा के आसान तरीके के साथ दुर्गासप्तशती के ऐसे ही ५ चमत्कारी मंत्र-
सुबह-शाम स्नान के बाद लाल वस्त्र पर विराजित देवी लक्ष्मी या दुर्गा की तस्वीर पर कुंकुम, अक्षत, लाल फूल अर्पित करें। माता को गाय के घी से बने पकवानों का भोग लगाएं। धूप व दीप जलाकर बताए जा रहे मंत्रों का स्मरण हाथ में लाल फूल व अक्षत लेकर करें। मंत्र जप कम से कम १०८ बार करना भी बहुत शुभ होता है। भाग्य बाधा दूर करने व सौभाग्य की कामना से इस मंत्र का स्मरण करें-
देहि सौभाग्य आरोग्यं देहि में परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि।।
हर सुख व खुशहाली पाने के लिए इस मंत्र का स्मरण करें-
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
दरिद्रता, अभाव या दुःख दूर करने के लिए नीचे लिखा मंत्र बोलें-
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्रयःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्दचित्ता।।
हर तरह से शक्ति संपन्न बनने के लिए इस मंत्र का स्मरण करें-
सृष्टिस्थितिविनाशानं शक्तिभूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोस्तुते।।
धन, संतान बाधा या परेशानियों को दूर करने के लिए इस मंत्र का स्मरण करें-
सर्व बाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः
इस प्रकार मां आदि शक्ति जगदम्बा अपनी इच्छा से नवग्रहों, नौ अंकों सहित समस्त ब्रह्मांड की दृश्य व अदृश्य वस्तुओं, विद्याओं व कलाओं को शक्ति दे संचालित कर रही हैं। भगवती के नव रूपों की शक्ति से ही संपूर्ण संसार संचालित हो रहा है। अतः मां दुर्गा-देवी की कृपा हेतु नियमित रूप से नौ दिनों तक ‘नवार्ण मंत्रों’ द्वारा वंदना करना चाहिए।

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