मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय : भीषण सूखे की आहट!

संपादकीय : भीषण सूखे की आहट!

मृग नक्षत्र का पूर्वार्ध बीत गया फिर भी महाराष्ट्र में मानसून का अब तक अता-पता नहीं है। मृग नक्षत्र के ७ जून का मुहूर्त तो मानसून ने बिता ही दिया; लेकिन अब १५ जून बीत जाने पर भी गर्मी की लहर से झुलस रहे महाराष्ट्र में बारिश के न आने से सूखे की तपिश महसूस होने लगी है। विश्व मौसम संगठन ने पहले ही अल नीनो नामक खतरनाक मौसम स्थिति के सक्रिय होने की चेतावनी दे दी है। हालांकि, कभी-कभी ऐसे वैज्ञानिक चेतावनी या मौसम के अनुमान प्रकृति के सामने झूठे साबित हो जाते हैं। अक्सर ऐसे अनुमान गलत साबित होने के कई उदाहरण हैं। फिर भी, इस बार दुर्भाग्य से मौसम विभाग का यह इतिहास बिल्कुल सच साबित होता दिख रहा है। जून के पहले हफ्ते में अंडमान में मानसून का समय पर आगमन होने के बाद केरल से कर्नाटक तक मानसून की यात्रा हर साल की तरह हुई। ऐसे में अल नीनो का संकट टल जाएगा और मुंबई सहित पश्चिम महाराष्ट्र में भी मानसून समय पर पहुंचेगा और वहां से मराठवाड़ा, विदर्भ में मृग नक्षत्र की जोरदार बारिश होगी, ऐसा आशावादी चित्र बन गया था। मगर ६ जून के बाद हालात बदल गए। मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई। महाराष्ट्र-गोवा की सीमा पर ही मानसून अटक गया। प्रशांत महासागर की सतह के पानी के तापमान में हुई अस्वाभाविक वृद्धि यानी अल नीनो इफेक्ट की वजह से
बारिश का आगमन
लंबा खिंच गया। पहले मुंबई में प्रवेश किए बिना कर्नाटक से सांगली, सोलापुर के रास्ते शॉर्टकट से मानसून मराठवाड़ा-विदर्भ में प्रवेश करेगा और बाद में मुंबई में दाखिल होगा, ऐसा एक कयास भी विशेषज्ञों ने लगाया था। मगर वह अनुमान भी मानसून ने ध्वस्त कर दिया। अल नीनो के कारण इस साल बारिश में लंबी देरी होगी और कुल मिलाकर इस साल वर्षा कम होगी, विश्व मौसम संगठन का यही अनुमान सच होता दिख रहा है। मृग नक्षत्र सूखा जा रहा है, इसलिए अब किसानों की पूरी उम्मीद २२ जून से शुरू होने वाले आर्द्रा नक्षत्र पर टिकी है। दरअसल, हर साल १५ जून तक आधी से ज्यादा बुआई या तो पूरी हो जाती है या जमीन में नमी आने के लिए किसान बुआई का इंतजार कर रहे होते हैं। मगर इस साल पूरे महाराष्ट्र में कहीं भी मानसून की बौछारें न गिरने से बुआई का नामोनिशान नहीं है। पिछले ४०-५० सालों का सबसे गर्म गर्मी का मौसम इस साल महाराष्ट्र और देश ने झेला। गर्मी के इस प्रकोप से खेत-खलिहान झुलस गए, तप गए, कुएं सूख गए, अनगिनत तालाब सूख गए, राज्य के बांधों में जल भंडार सिर्फ २५ फीसदी पर आ गया। महाराष्ट्र में छोटे-बड़े कुल ३,०२८ बांध हैं। इन बांधों के जल भंडार की स्थिति खतरनाक स्तर तक नीचे गिर गई है। मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले सात प्रमुख बांधों में सिर्फ १२.४८ फीसदी पानी ही बचा है।
बांधों का जल भंडार
तेजी से नीचे जा रहा है इसलिए महाराष्ट्र सरकार के जलसंपदा विभाग ने खेती का पानी बंद करके बांधों का पानी सिर्फ पीने के लिए ही सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। एक-दो जगह कहीं छिटपुट बारिश हुई तो बुआई की जल्दी मत करो, जमीन में नमी टिके रहने तक इंतजार करो, ऐसी सलाह सरकार ने किसानों को दी है। वैसे सालों से खेती करने वाले किसानों को इसकी जानकारी होती ही है। दो-चार बड़ी बारिश हुए बिना वह बुआई करने की हिम्मत ही नहीं करता। शुरुआत में जोरदार बारिश हुई और बाद में गायब हो गई, तभी दोबारा बुआई के संकट का सामना किसानों को करना पड़ता है। मगर मानसून ने इस साल शुरू में ही दगा दे दिया इसलिए ग्रामीण इलाकों में कहीं भी बुआई तो छोड़ो; पूर्व तैयारी की हलचल भी नहीं दिख रही। मानसून के धोखा देने के कारण पहले से ही गर्मी की लहर में झुलसे महाराष्ट्र पर सूखे का साया मंडराने लगा है। प्रशांत महासागर का बढ़ा हुआ तापमान और अरब सागर, बंगाल की खाड़ी सहित हिंद महासागर में बारिश बढ़ाने के लिए जरूरी तत्वों की स्थिति भी तटस्थ होने से अल नीनो का असर और तीव्र होने का खतरा बढ़ गया है। डेढ़ सौ साल में सबसे बड़ा अल नीनो का यह प्राकृतिक संकट यानी कम बारिश और भीषण सूखे के संकेत ही है। किसान, आम जनता और सरकार को भी इसका सामना करने के लिए अभी से तैयार रहना चाहिए!

अन्य समाचार