मन के भाव जगाता चल।
देशभक्ति भी गाता चल।।
अपना जीवन बने सुहाना।
ऐसा राग सुनाता चल।।
औरों को भी बड़े प्यार से।
हरदम गले लगाता चल।।
सद्विचार वाले लोगों को।
अपने पास बुलाता चल।।
मंजिल तेरी दूर नहीं है।
सबसे हाथ मिलाता चल।।
अपने इस गंभीर समय में।
थोड़ा हंसता-गाता चल।।
राह कठिन है फिर भी मन में।
जरा-जरा मुस्काता चल।।
अच्छे जन की सेवा करके।
जीवन सफल बनाता चल।।
सहयोगी को प्रेम पिलाकर।
अपना उसे बनाता चल।।
मानव का कल्याण सोचकर।
हरदम कदम बढ़ाता चल।।
सामाजिक संबंध जोड़कर।
उत्सव नया मनाता चल।।
भारत मां के श्रीचरणों में।
हरदम शीश झुकाता चल।।
-अन्वेषी
