रवीन्द्र मिश्रा / मुंबई
कुर्ला पश्चिम में एक पान की छोटी-सी टपरी से अपनी आजीविका चलाने वाले 70 वर्षीय राजेश उपाध्याय की खुशी का उस समय ठिकाना नहीं रहा, जब उनके सामने पिछले 11 महीनों से गायब उनकी बेटी ने उन्हें ‘पापा’ कहकर पुकारा। पहले तो उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब उनकी बेटी ने कहा, “बापू, मैं ट्विंकल हूं”, तो राजेश उपाध्याय अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक पाए और बेटी को गले लगाकर रोने लगे।
भारती उर्फ ट्विंकल के पिता राजेश उपाध्याय बताते हैं कि उनकी 33 वर्षीय बेटी जुलाई 2025 के अंतिम सप्ताह में मंदिर जाने के लिए घर से निकली थी। लेकिन देर शाम तक जब उसका कहीं पता नहीं चला, तो नवघर पुलिस स्टेशन में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई।
मानसिक रूप से कमजोर इस लड़की को ढूंढने के प्रयास किए गए। अखबारों में विज्ञापन दिए गए तथा सोशल मीडिया पर खबरें प्रकाशित हुईं। लोगों ने पुलिस की निष्क्रियता पर अंगुली भी उठाई, फिर भी कुछ हासिल नहीं हुआ।
उन्होंने कहा, “भगवान भला करे ग्रेस फाउंडेशन का, जिन्होंने हमें हमारी बेटी से मिला दिया।”
छानबीन करने पर पता चला कि नवघर रोड स्थित अपने घर से गायब होने वाली ट्विंकल को कभी साकी नाका पुलिस, तो कभी ठाणे के मानसिक अस्पताल, तो कभी घाटकोपर की अनुग्रह जीवन संस्था और कभी शरण संस्था की देखरेख में महीनों रहना पड़ा। कहीं उसे 13 वर्ष की लड़की बताया गया, कहीं 20 वर्ष और कहीं 33 वर्ष। कहीं उसके नाम के आगे सिंह लिखा गया, तो कहीं उपाध्याय। जितने मुंह, उतनी बातें।
इस मामले में ग्रेस फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष श्री शंकर मुगलखोड ने बताया कि सामाजिक संस्था शरण ने इस लड़की को उनके आश्रम में भेजा। उन्होंने सायन अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों से उसका उपचार करवाया, जिससे वह स्वस्थ होकर अपने परिवार से मिल सकी।
