जी७ बनाम एआई का रायता
राज ई
फ्रांस के एवियन में जी७ की महफिल सजी, तो दुनिया के रईस और रसूखदार देशों ने जमकर ठुमके लगाए। लेकिन इस पार्टी में चीन को ‘नो एंट्री’ का बोर्ड थमा दिया गया। अब जब अंगूर हाथ नहीं आए, तो चीन की भौंवें का तनना और मिर्च लगना तो लाजिमी था! खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की तर्ज पर बीजिंग ने आव देखा न ताव, तुरंत अपनी अलग ढपली और अलग राग अलापने का एलान कर दिया।
जिनपिंग का नया शिगूफा: ‘वर्ल्ड एआई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन’
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने प्रेस कॉन्प्रâेंस में छाती ठोककर कहा कि वे अपना खुद का नया ग्रुप बना रहे हैं। इसका मकसद अमेरिकी दादागीरी को ठेंगा दिखाना और खुद को ‘ग्लोबल चौधरी’ साबित करना है, ‘हम पूरी दुनिया की कमान हाथ में लेने को तैयार हैं, जिसे आना हो आ जाओ!’
अमेरिका के दुश्मनों की ‘पलटन’ और जिनपिंग की टीम
चीन अब उन देशों की पीठ थपथपा रहा है, जो पश्चिमी देशों की नजरों में खटकते हैं। इस ‘चोखा-बाटी’ गैंग में कौन-कौन शामिल हो सकता है, आइए देखते हैं।
ईरान और रूस: ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है’ वाले फॉर्मूले पर चीन सबसे पहले ईरान और रूस जैसे अमेरिका के जानी दुश्मनों को अपनी गोदी में बिठाने की तैयारी में है।
ग्लोबल साउथ के मोहरे: एशिया, अप्रâीका और लैटिन अमेरिका के वो देश जो कर्ज के जाल या पश्चिमी उपेक्षा के शिकार हैं, उन्हें चीन ‘एआई क्रांति’ का लॉलीपॉप थमा रहा है।
ब्रिक्स और शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन का तड़का: चीन इन पुराने संगठनों के कंधों का इस्तेमाल कर अपनी नई बंदूक चलाने की फिराक में है।
कुल मिलाकर, चीन अब ‘आ बैल मुझे मार’ वाली स्थिति पैदा कर रहा है। देखना यह है कि जिनपिंग का यह ‘एआई का रायता’ दुनिया को कितना पसंद आता है या फिर यह सिर्फ एक चीनी पटाखा बनकर फुस्स हो जाता है!
चीन ने अमेरिका को टक्कर देने के लिए यह दांव तो चल दिया है, लेकिन क्या आपको लगता है कि रूस और ईरान जैसे देश वाकई तकनीकी मामलों में चीन के भरोसे अपनी नैया पार लगा पाएंगे?
