मुख्यपृष्ठसमाचार‘विकास' की कीमत पर रोजगार पर वार!

‘विकास’ की कीमत पर रोजगार पर वार!

-गोरेगांव में ४३ दुकानों पर कार्रवाई

-पुनर्वास पर मनपा ने साधी चुप्पी

जेदवी / मुंबई

मुंबई में विकास परियोजनाओं के नाम पर एक बार फिर बुलडोजर की राजनीति चर्चा में है। गोरेगांव (पश्चिम) रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित बंदू गोरे मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के लिए बुधवार को मनपा ने ४३ गैर-आवासीय ढांचों को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन इसे यातायात सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, लेकिन प्रभावित छोटे कारोबारियों और उनके भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। मनपा के पी-दक्षिण वार्ड द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद वर्षों से कारोबार कर रहे कई लोगों की रोजी-रोटी पर संकट मंडराने लगा है।
प्रशासन का कहना है कि संबंधित ढांचों को पहले नोटिस जारी किए गए थे और उन्हें स्वयं हटाने का समय भी दिया गया था। समयसीमा समाप्त होने के बाद पुलिस बंदोबस्त में कार्रवाई को अंजाम दिया गया। मनपा के अनुसार, बंदू गोरे मार्ग की चौड़ाई लगभग ३० फीट से बढ़ाकर ४४ फीट की जाएगी। गोरेगांव रेलवे स्टेशन और एस.वी. रोड को जोड़ने वाला यह मार्ग रोजाना हजारों यात्रियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। संकरी सड़क और अतिक्रमण के कारण यहां लंबे समय से ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई थी। प्रशासन का दावा है कि सड़क चौड़ी होने के बाद यातायात व्यवस्था में सुधार आएगा और पैदल यात्रियों को राहत मिलेगी। हालांकि इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल पुनर्वास को लेकर खड़ा हो गया है। मनपा यह जरूर कह रही है कि प्रभावित गैर-आवासीय ढांचों के लिए नियमानुसार पुनर्वास अथवा स्थानांतरण की प्रक्रिया मौजूद है, लेकिन इसकी स्पष्ट रूपरेखा सार्वजनिक नहीं की गई है। प्रभावित लोगों का कहना है कि यदि वैकल्पिक व्यवस्था पहले सुनिश्चित की जाती तो उनकी आजीविका पर अचानक संकट नहीं आता। स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि शहर का विकास आवश्यक है, लेकिन विकास की कीमत हमेशा छोटे व्यापारियों और आम लोगों को ही क्यों चुकानी पड़ती है? मुंबई में यह पहली बार नहीं है जब सड़क, मेट्रो या अन्य परियोजनाओं के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई हो।
-बंदू गोरे मार्ग को ३० फीट से बढ़ाकर ४४ फीट चौड़ा किया जाएगा।
-४३ गैर-आवासीय ढांचे हटाए गए।
-गोरेगांव स्टेशन और एस.वी. रोड के बीच यातायात सुगम बनाने का दावा।
-पुनर्वास की प्रक्रिया पर अभी भी स्पष्टता का अभाव।

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