मुख्यपृष्ठस्तंभअथ श्री परजीवी कथा

अथ श्री परजीवी कथा

मनमोहन सिंह

`परजीवी’ यानी हमारे प्यारे पैरासाइट्स आजकल टॉक ऑफ द टाउन बने हुए हैं! वैसे बात तो सही है, आजकल आप टीवी चालू करें, कोर्ट की कार्यवाही देखें या सोशल मीडिया स्क्रॉल करें, ऐसा लगता है जैसे पूरी दुनिया ही एक `बायोलॉजी की लैब’ बन गई है, जहां हर कोई एक-दूसरे को `परजीवी’ घोषित करने में जुटा है।
आइए, इस ट्रेंडिग शब्द और इस `परजीवी महोत्सव’ का जरा मजेदार एनालाइज करते हैं परजीवियों की वैरायटी और कौन कहां चिपक कर बैठा है?
आजकल के आधुनिक परजीवी वो नहीं हैं जो सिर्फ पेट में रहकर दर्द पैदा करते थे। अब तो इनकी ऐसी-ऐसी प्रजातियां आ गई हैं कि डार्विन भी देखकर अपना सिर खुजला लें। आइए बात करते हैं राजनीतिक परजीवी की। ये वो प्रजाति है जो जनता की भावनाओं और मुद्दों के रस पर जिंदा रहती है। चुनाव आते ही ये जनता के पैरों से चिपक जाते हैं और जैसे ही वोट रूपी खून चूसा, ये गायब होकर पांच साल के लिए एसी कमरों में `हाइबरनेशन’ यानी शीतनिद्रा में चले जाते हैं। सोशल मीडिया परजीवी की बात करें तो ये दूसरों की मेहनत, दूसरों के वीडियो और दूसरों के ट्वीट्स पर `लाइक और शेयर’ की खेती करते हैं।
किसी ने अच्छी बात लिखी नहीं कि ये कॉपी-पेस्ट मारकर खुद को बुद्धिजीवी घोषित कर देते हैं। इनका मुख्य भोजन है, दूसरों का कंटेंट।
अब बात करते हैं रणनीतिक और अदालती परजीवियों की। कोर्ट-कचहरी से लेकर बड़ी-बड़ी कॉर्पोरेट रणनीतियों तक, कुछ लोग सिर्फ व्यवस्था की कमियों का खून चूसकर मोटे होते हैं। काम कुछ नहीं करना, बस जहां लूपहोल दिखा, वहीं पाइप डाल के बैठ गए। यह शब्द इतना लोकप्रिय क्यों है क्योंकि `परजीवी’ शब्द की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसे बोलने में जो सुख मिलता है, उसकी कोई सीमा नहीं है। जब आप किसी को `परजीवी’ बोलते हैं, तो आप खुद को ऑटोमैटिकली `उत्पादक और देशभक्त’ घोषित कर देते हैं, भले ही आप खुद दिनभर रील देखकर समय बर्बाद कर रहे हों। आजकल राजनीति और रणनीति के मंचों पर यह गाली कम और `स्टेटस सिंबल’ ज्यादा बन गया है। अगर किसी बहस में आपने सामने वाले को दो-चार बार `परजीवी’ या `आंदोलनजीवी’ नहीं बोला, तो आपकी डिबेट ही अधूरी मानी जाती है। तो हुजूर, इस परजीवी गाथा का सार यही है कि जब तक इस दुनिया में `मेहनत करने वाले’ सीधे-साधे लोग रहेंगे, तब तक `बैठकर मलाई मारने वाले’ परजीवियों का धंधा मंदा नहीं होने वाला। अगली बार जब आप किसी को सोशल मीडिया पर ज्ञान झाड़ते देखें, तो समझ जाइएगा कि एक और नया परजीवी बाजार में लॉन्च हो चुका है!

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