मुख्यपृष्ठसमाचारदवा के नाम पर जहर का धंधा... बच्चों की जान से खिलवाड़!

दवा के नाम पर जहर का धंधा… बच्चों की जान से खिलवाड़!

-न बैच नंबर, न बनाने की तारीख और न ही एक्सपायरी डेट

-९ लाख की दवाइयां जब्त

फिरोज खान / मुंबई

मुंबई में अब दवा के नाम पर जहर का धंधा धड़ल्ले से किया जा रहा है। बिना बैच नंबर, मैन्युपैâक्चिंरग की तारीख और बगैर एक्सपायरी डेट की दवाइयां बेचकर बच्चों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि दवाइयों को कोई फार्मासिस्ट नहीं बेच रहा था बल्कि १२वीं पास युवक सप्लाई कर रहा था। इस तरह का हैरान कर देने वाले मामले का खुलासा तब हुआ जब फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने मुंबई के गोवंडी इलाके में एक बच्चों के हॉस्पिटल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है और बिना लाइसेंस के एलोपैथिक दवाएं बेचने का पर्दाफाश किया है। जांच के दौरान करीब ९.०९ लाख रुपये की दवाओं का स्टॉक और बिक्री के लिए इस्तेमाल की गई बिल बुक जब्त की गई। इस मामले से हेल्थ सेक्टर में हलचल मच गई है। एफडीए ने लोगों की सेहत की सुरक्षा और दवाओं की कानूनी बिक्री सुनिश्चित करने के लिए पूरे राज्य में एक खास जांच अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत १८ जून को गोवंडी-ईस्ट में मुस्कान एनआईसीयू और बच्चों के अस्पताल की जांच की गई। जांच के दौरान पता चला कि दो अलग-अलग कमरों में बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं रखी हुई थीं। शॉकिंग बात यह है कि अस्पताल में १२वीं पास रिसेप्शनिस्ट के जरिए दवाएं बेची जा रही थीं, जबकि उसके पास वैलिड ड्रग सेल्स लाइसेंस नहीं था। एफडीए अधिकारियों ने इंस्पेक्शन के दौरान दवा बेचने के लिए इस्तेमाल की गई बिल बुक भी जब्त कर लीं। इन बिलों पर मरीज का नाम, दवा का नाम और उसकी मात्रा, दूसरी जरूरी बातें नहीं लिखी थीं। यह भी देखा गया कि दवाओं का बैच नंबर, बनाने की तारीख, एक्सपायरी डेट और मैन्युफैक्चरिंग वाली कंपनी की जानकारी नहीं थी।
बिना लाइसेंस बिक रहीं थीं बच्चों की दवाएं
गोवंडी स्थित एक बच्चों के अस्पताल में एफडीए की छापेमारी में ९.०९ लाख रुपये की दवाएं जब्त की गईं। जांच में सामने आया कि बिना ड्रग लाइसेंस और बिना फार्मासिस्ट के १२वीं पास रिसेप्शनिस्ट दवाएं बेच रहा था। कई दवाओं पर बैच नंबर और एक्सपायरी डेट भी नहीं थी।

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