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मासूमों का बाजार

मनमोहन सिंह

‘भाई साहब, एडवांस का दो लाख छोड़िए, बाकी के छह लाख रुपए भी तैयार रखिएगा। अस्पताल से बच्चे के जन्म का जो सर्टिफिकेट मिलेगा, उस पर सीधे आपकी पत्नी का नाम होगा। कोई उंगली नहीं उठा पाएगा,’ दिल्ली के आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन की धुंधली रोशनी में खड़ी ज्योति उर्फ कमली ने सामने खड़े शख्स को आश्वस्त करते हुए फुसफुसाकर कहा। उसकी गोद में चार दिन का मासूम हल्के से कसमसाया।
शख्स ने जेब से नोटों की गड्डी निकालने का नाटक किया और धीरे से मुस्कुराया, ‘कागज पक्के हैं न मैडम? कहीं पुलिस का चक्कर तो नहीं पड़ेगा?’ ज्योति ने आत्मविश्वास से हंसते हुए कहा, ‘अरे, डॉक्टर हमारी मुट्ठी में है, आप बेफिक्र रहिए।’
उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिसे वह सीधा-साधा खरीदार (नि:संतान पिता) समझ रही थी, वह असल में भेष बदले दिल्ली पुलिस का एक सब-इंस्पेक्टर था। ज्योति ने जैसे ही बच्चे को आगे बढ़ाया, उस शख्स ने इशारा कर दिया। अगले ही पल, चारों तरफ से घेराबंदी कर पुलिस की टीम ने छापा मारा और इस काले कारोबार का भंडाफोड़ कर दिया।
१३ गिरफ्तार, ५ मासूम सुरक्षित
दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑपरेशन यूनिट ने एक बड़े अंतर्राज्यीय शिशु तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए १३ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में पांच नवजात शिशुओं को सुरक्षित मुक्त कराया गया है, जिनमें से चार बच्चे आदिवासी परिवारों से हैं। गिरफ्तार आरोपियों में तस्कर, बिचौलिए और बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल की संचालक डॉ. विवेकी शामिल हैं। इस अस्पताल का इस्तेमाल बच्चों को छिपाने और फर्जी जन्म प्रमाण पत्र व मेडिकल रिकॉर्ड तैयार कर अवैध गोद लेने की प्रक्रिया को वैध दिखाने के लिए किया जाता था।
लाखों का काला बाजार
यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के तार देश के कई हिस्सों से जुड़े थे। यह गिरोह गरीब और आदिवासी परिवारों से बच्चों को मात्र १.५ लाख से २ लाख रुपये में खरीदता था। इसके बाद, इन मासूमों को मोटी रकम की चाह रखने वाले नि:संतान दंपतियों को ६ लाख से ८ लाख रुपए तक में बेच दिया जाता था। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान दिल्ली, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) और पानीपत (हरियाणा) से कुल ५ बच्चों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया है।

पांच राज्यों में फैला था नेटवर्क
यह गिरोह दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे पांच राज्यों में फैला हुआ था। मुख्य संचालक ज्योति अलग-अलग राज्यों के बिचौलियों के संपर्क में थी। राजस्थान और गुजरात से बच्चों की सप्लाई का जिम्मा सायबाभाई उर्फ कालिया संभालता था, जबकि मध्य प्रदेश और हरियाणा के पानीपत जैसे शहरों में खरीदार ढूंढे जाते थे। पहाड़गंज थाने में एफआईआर दर्ज कर पुलिस अब इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह गिरोह अब तक कितने बच्चों को अपना शिकार बना चुका है।

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