सामना संवाददाता / मुंबई
गद्दार सांसदों की ओर से आदित्य ठाकरे की सक्रियता पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब-जब उनके परिवार पर राजनीतिक हमले हुए, तब आलोचना करनेवाले नेताओं में से कोई भी उनके समर्थन में खड़ा नहीं हुआ। उन्होंने सवाल किया कि परिवार और पार्टी पर संकट के समय क्या इन नेताओं में से किसी ने आगे बढ़कर संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि उन गद्दारों को जनता ने शिवसेना और बालासाहेब ठाकरे के नाम पर चुना था। जनता ने उन पर नहीं शिवसेना और ठाकरे परिवार पर विश्वास किया। लेकिन आज वही गद्दारी की राह पर हैं। इसके लिए मैं उन क्षेत्रों के मतदाताओं से सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगता हूं।
भाजपा सत्तापिपासु
उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि चुनावी लाभ के लिए सरकारी एजेंसियों और सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पश्चिम बंगाल चुनाव जीतने के लिए इतनी बड़ी ताकत झोंकी जा सकती है तो राष्ट्रीय सुरक्षा और पीओके सीमा संबंधी मुद्दों पर वही दृढ़ता क्यों नहीं दिखाई जाती। हमारा समर्थन भी होगा
यह हिंदुत्व नहीं, ढोंग है
अपने जोरदार भाषण में उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि शिवसेना का हिंदुत्व राष्ट्रवाद और समाज को जोड़नेवाला विचार है, जबकि धर्म और प्रतीकों के नाम पर विभाजन पैदा करना वास्तविक हिंदुत्व नहीं है। हमारा हिंदुत्व राष्ट्रीयता है। और भगवा किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है, भगवा में भेद करनेवाले सच्चे हिंदू नहीं हैं। यह भगवा छत्रपति शिवाजी महाराज, संत परंपरा और व्यापक हिंदू समाज की पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और पार्टी की ‘मशाल’ को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
गद्दार सांसदों और भाजपा पर साधा निशाना
अपने पूरे भाषण में उद्धव ठाकरे ने भाजपा और शिंदे के नेतृत्व वाले गुट पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि शिवसेना को गद्दारों और अवसरवादी राजनीति करनेवालों के हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा। ठाकरे ने कहा कि पार्टी कठिन दौर से गुजर रही है, लेकिन वह किसी भी परिस्थिति में झुकनेवाले नहीं हैं। शिवसेना की लड़ाई विचारों और स्वाभिमान की लड़ाई है।
मुझे कभी पद का लालच नहीं रहा
उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में कहा कि यदि उन्हें पद की लालसा होती तो मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद विधान परिषद के रास्ते सत्ता में बने रह सकते थे। उन्होंने कहा कि पिछले १२-१३ वर्षों से वह संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं और यदि अब उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए जा रहे हैं तो अंतिम पैâसला शिवसैनिकों को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मुझ पर उंगली उठती है तो मैं कुर्सी से चिपककर नहीं बैठता। मैंने तुरंत इस्तीफा दिया। यह महाराष्ट्र ने तब भी देखा था जब मैंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा था।
झलकियां
-स्वार्थ से सनी राजनीति के इस घने अंधकार में भी, ‘हिंदूहृदयसम्राट’ शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के विचारों की मशाल थामे पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने शिवसैनिकों के आगे की राह के लिए मार्गदर्शन किया। उद्धव ठाकरे का भाषण बिल्कुल वैसा ही था, जैसे अपने बदन पर जख्म खाकर भी दुश्मन पर टूट पड़नेवाला कोई सेनापति हो। उनके एक-एक शब्द में वही पुराना जोश और आक्रोश साफ महसूस हो रहा था।
-‘किसलिए पार्टी तोड़ रहे हैं, क्यों यह तोड़-फोड़ मची है? इन्हें आखिर हासिल क्या करना है? सत्ता के भूखे लोगों की फितरत क्या होती है, यह आज साफ दिखाई दे रहा है,’ इन शब्दों में वे पार्टी तोड़नेवालों पर जमकर बरसे।
-उद्धव ठाकरे ने दिल्ली के हुक्मरानों पर तीखा तंज कसते हुए कहा, ‘आज बीजेपी के पास संसद में दो-तिहाई बहुमत नहीं है, बल्कि उनके सांसदों में से दो-तिहाई सांसद बाहर से आए हुए बाहरी सबलोग हैं।’
-गद्दारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने गरजकर कहा, ‘जब ठाकरे परिवार पर हमले और टीका-टिप्पणी हो रही थी, तब इन गधों में से विरोधियों के वार झेलने कौन आगे आया था?’
-उद्धव ठाकरे के सुलगते हुए भाषण के दौरान शिवसैनिकों का समंदर इस तरह जवाब दे रहा था मानो उसमें आग लग गई हो। ‘जय भवानी, जय शिवाजी’ के नारों के साथ आनेवाले वक्त की लड़ाई का बिगुल पंâूका जा रहा था। ‘गद्दारों को छोड़ेंगे नहीं’ और ‘उद्धव साहब आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं’ जैसे गगनभेदी नारों से पूरा सभागार गूंज उठा।
