हनीफ जवेरी
फिल्मी दुनिया की चमक-दमक के पीछे कई ऐसी कहानियां छिपी होती हैं, जो जितनी दिलचस्प होती हैं, उतनी ही चौंकानेवाली भी। साथ काम करनेवाले दो दोस्तों का किसी छोटी-सी घटना पर टकरा जाना और आपस में मनमुटाव कर लेना बहुत अजीब है।
कुछ ऐसा ही हुआ हिंदी सिनेमा के मशहूर निर्देशक राज खोसला और बांग्ला फिल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री सुचित्रा सेन के बीच, जब उनकी निर्माणाधीन फिल्म ‘बम्बई का बाबू’ सेट पर थी!
निर्देशक राज खोसला को शुरू से ही सुचित्रा सेन के साथ एक फिल्म करने की आरजू थी। अपनी पहली फिल्म ‘मिलाप’ (१९५५) के तुरंत बाद, राज खोसला ने गुरुदत्त फिल्मस के लिए सुचित्रा सेन को एक नायिका-प्रधान विषय सुनाया था। लेकिन पहले सुचित्रा सेन और उसके बाद स्वयं गुरुदत्त ने उस पर फिल्म बनाने से मना कर दिया। इसके बाद गुरुदत्त ने खोसला को लेकर फिल्म ‘सीआईडी’ शुरू की, जो बॉक्स ऑफिस पर कामयाब रही। हालांकि, देव आनंद भी सुचित्रा सेन के साथ एक फिल्म करना चाहते थे। इसकी जानकारी राज खोसला को थी और वे ऐसे विषय की तलाश में थे, जिसमें देव आनंद के साथ सुचित्रा उपयुक्त रूप से फिट हो सकें।
जब राज खोसला को फिल्म ‘बंबई का बाबू’ का विषय मिला तो उन्होंने तुरंत उसका स्क्रीनप्ले जी.आर. कामत से और संवाद राजेंद्र सिंह बेदी से लिखवाए। इसके बाद उन्होंने यह कहानी देव आनंद के साथ-साथ गुरुदत्त को भी सुनाई। गुरुदत्त को यह विषय खास पसंद नहीं आया तो खोसला ने स्वयं ही फिल्म का निर्माण करने का निर्णय लिया और नया फिल्म्स के बैनर की स्थापना कैमरामैन जाल मिस्त्री की मदद से की गई और फिल्म ‘बंबई का बाबू’ की शुरुआत देव आनंद और सुचित्रा सेन की जोड़ी के साथ हुई। फिल्म का कामकाज ठीक ही चल रहा था और कम समय में यह फिल्म आधे से ज्यादा बनकर तैयार हो गई। अब इसकी एक आउटडोर शूटिंग नैनीताल में हो रही थी। इस शूटिंग में अभिनेत्री सुचित्रा भी शामिल थीं।
राज खोसला ने अपने एक असिस्टेंट का जन्मदिन मनाने के लिए उसी होटल के लॉन में एक छोटी-सी पार्टी रखी, जहां सुचित्रा सेन अपने पति देबनाथ के साथ ठहरी हुई थीं। सुचित्रा के कमरे से वह लॉन साफ दिखाई देता था और पार्टी में तेज संगीत बज रहा था, जिससे उनकी नींद में खलल पड़ रहा था।
एक बार उनके पति ने और एक बार स्वयं सुचित्रा ने राज खोसला से शोर कम करने का अनुरोध किया, लेकिन सुचित्रा ने कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग कर दिया, जिससे खोसला नाराज हो गए और उन्होंने पार्टी बंद करने से इनकार कर दिया। नतीजतन, अगली सुबह सुचित्रा सेन अपने पति के साथ शूटिंग छोड़कर कलकत्ता के लिए रवाना हो गर्इं। मामला इतना बढ़ गया कि सुचित्रा शूटिंग के लिए दोबारा तारीख देने को तैयार नहीं थीं।
खोसला और सेन के कई शुभचिंतकों ने दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश की थी, लेकिन वे नाकाम रहे। फिल्म का प्रगति कार्य खटाई में पड़ गया और सुचित्रा सेन ने अपनी बकाया रकम को लेकर खोसला पर मुकदमा दायर कर दिया। अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच लंबी बहस हुई और अंत में अदालत ने मिसेज सेन को आदेश दिया कि वे अपनी रकम मांगने से पहले अपना काम यानी फिल्म की शूटिंग पूरी करें।
सुचित्रा सेन ने फिल्म ‘बंबई का बाबू’ के लिए तारीखें दीं और यह उनकी पहली फिल्म थी, जिसके शूट पर वे अपने सुरक्षा गार्डों के साथ आती थीं। वे बिना निर्माता-निर्देशक खोसला से बात किए और बिना कुछ खाए-पीए, केवल डायरेक्टर के आदेश का पालन करती थीं। इस तरह फिल्म की शूटिंग पूरी हुई।
अपने समय से देर से बनने के बावजूद, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही और आज इसे एक क्लासिक कल्ट फिल्म माना जाता है।
