जीवन की सांसें हों मुट्ठी भर
या एक भारी-भरकम गठड़ी,
बस हों अपनी ही,
न रेहन पर, न किसी की दया पर,
न जमानत पर, न उधारी पर। 😌
यों तो पिंजरे में भी
हवा गुजर जाती आर-पार।
पंख खुलते नहीं, बस है लाचार।
शुक देख रहा निरीह आंखों से
औरों की स्वच्छंद उड़ान। 🦜
तितली के पंखों के मोहक रंग,
उड़ने की अदा देती सपने जगा।
मेघों, वायु के रहमोकरम पर रहती।
बरस जाएं बेदर्द मेघ, उठे आंधी-तूफान,
गिर धरा पर, भूल जाती अपनी उड़ान। 🦋
एक-दूसरे से बंधे हैं सब।
दामिनी मेघों पर, मेघ वाष्प पर,
वाष्प ताप पर और ताप सूर्य पर। 🌞
इंद्रधनुष में एक साथ
जुड़ जाते सारे रंग।
छिटक कर बिखर जाएं तो
रंग सभी दिखते
खिले-खिले हुए फूलों में। 🌈
मजबूत इरादों वाला इंसान
अपने हाथ नहीं फैलाता।
न करता समझौता कठिनाई में,
पर बेटी के सुख की खातिर
तोड़ देता अपनी कसमें, मर्यादाएं।
हाथ जोड़ खड़ा होता,
बिटिया सुखी हो जाए।
बेला विरदी।
