मुख्यपृष्ठस्तंभफलसफा: गलत फैसला सिर्फ एक व्यक्ति की जिंदगी नहीं बदलता

फलसफा: गलत फैसला सिर्फ एक व्यक्ति की जिंदगी नहीं बदलता

सना खान

एक बुजुर्ग अक्सर अपने पोते से कहा करते थे, ‘बेटा, कोई भी फैसला लेने से पहले एक बार यह जरूर सोच लेना कि उसका असर सिर्फ तुम पर नहीं पड़ेगा।’ पोता हर बार मुस्कुरा देता। उसे लगता था कि इंसान अपने फैसले खुद लेता है और उनके परिणाम भी खुद ही भुगतता है। एक दिन उसने अपने दादा से पूछा, ‘मेरे किसी फैसले से किसी और की जिंदगी कैसे बदल सकती है?’ बुजुर्ग उसे पास के तालाब के किनारे ले गए। उन्होंने एक छोटा-सा पत्थर उठाया और पानी में फेंक दिया। पत्थर गिरते ही पानी में गोल-गोल लहरें बनने लगीं। वे लहरें धीरे-धीरे दूर तक फैल गईं। दादा ने पूछा, ‘पत्थर कहां गिरा था?’ ‘यहीं, हमारे सामने,’ पोते ने जवाब दिया। ‘और लहरें कहां तक गईं? ‘काफी दूर तक,’ पोता बोला दादा मुस्कुराए और बोले, ‘फैसले भी ऐसे ही होते हैं। हम उन्हें एक जगह लेते हैं, लेकिन उनका असर बहुत दूर तक जाता है।’ उस समय पोते को यह बात पूरी तरह समझ नहीं आई। वर्षों बाद जब वह बड़ा हुआ, तो उसने अपने एक मित्र को गुस्से में ऐसा फैसला लेते देखा, जिसने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। एक घर ने अपना बेटा खो दिया। एक मां दरवाजे की ओर देखती रही, जबकि उसे पता था कि अब कोई लौटकर नहीं आएगा। दूसरे घर ने अपना सुकून खो दिया। वहां एक पिता चुपचाप बैठा सोचता रहा कि एक पल के फैसले ने उसके पूरे परिवार की जिंदगी कैसे बदल दी। जिन लोगों का उस फैसले से कोई सीधा संबंध नहीं था, वे भी उसके दर्द को झेलने लगे। उस दिन पोते को तालाब की वे लहरें याद आ गईं। उसे समझ आया कि दादा सिर्फ पत्थर और पानी की बात नहीं कर रहे थे। वे जीवन के फैसलों की बात कर रहे थे। उसे महसूस हुआ कि कुछ फैसले सिर्फ एक जीवन नहीं बदलते, बल्कि कई जिंदगियों की दिशा बदल देते हैं। एक पल का निर्णय कभी-कभी वर्षों तक लोगों की खुशियों, रिश्तों और भविष्य को प्रभावित करता रहता है। गलत फैसला सिर्फ एक व्यक्ति की जिंदगी नहीं बदलता। उसके प्रभाव की लहरें दूर तक जाती हैं और कई बेगुनाह लोगों को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए निर्णय लेने से पहले उसके परिणामों के बारे में सोच लेना ही समझदारी है।
पत्थर तो बस एक ही पानी में गिरा था,
मगर असर उसका किनारों तक गया था।
पैâसला एक था, मगर सीख यही मिली,
उसका नतीजा कई जिंदगियों तक गया था।

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