-सीजेपी की ५-६ अगस्त को रणनीतिक बैठक; उधर प्रदर्शन स्थल बदलने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
नई दिल्ली / छत्रपति संभाजीनगर
जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बाद उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अब अपने अगले चरण की रणनीति बनाने जा रही है। सीजेपी के संस्थापक, प्रवक्ता और प्रमुख संगठनकर्ता ५ और ६ अगस्त को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में दो दिवसीय बैठक करेंगे। संगठन ने साफ किया है कि फिलहाल वह चुनावी राजनीतिक दल नहीं बनाएगा, बल्कि देशभर के युवाओं की समस्याएं समझने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘लिसनिंग टूर’ शुरू करेगा।
इस बैठक में हालिया छात्र आंदोलन के अनुभवों, संगठन विस्तार, युवाओं से सीधे संवाद और सरकार पर वादे पूरे करने का दबाव बनाए रखने की रणनीति पर चर्चा होगी। सीजेपी का कहना है कि वह सत्ता हासिल करने के लिए राजनीतिक पार्टी बनने के बजाय बेरोजगारी, पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं की गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था से परेशान युवाओं की आवाज को संगठित करना चाहता है। विडंबना यह है कि जिस समय सीजेपी जंतर-मंतर से आगे देशभर में युवाओं तक पहुंचने की योजना बना रही है, उसी समय जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाए रखने पर सवाल खड़े हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है, जिसमें धरना-प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर के स्थान पर कोई वैकल्पिक स्थल निर्धारित करने की मांग की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि जंतर-मंतर पर लगातार होने वाले प्रदर्शनों से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है, आने-जाने के रास्ते बाधित होते हैं और चिकित्सा तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन चिंताओं को महत्वपूर्ण बताते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से संबंधित अधिकारियों से निर्देश लेने को कहा। हालांकि, अदालत ने अभी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने या उसे स्थानांतरित करने का कोई आदेश नहीं दिया है। फिलहाल केवल केंद्र और संबंधित प्राधिकारियों से जवाब मांगा गया है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शनकारियों के लिए बंद कर दिया गया है।
आंदोलन शहर से दूर भेजने की तैयारी तो नहीं?
जंतर-मंतर को वैकल्पिक स्थल से बदलने की मांग के पीछे स्थानीय निवासियों और आवश्यक सेवाओं की वास्तविक परेशानियां हो सकती हैं, लेकिन लोकतांत्रिक आंदोलनों के लिए स्थान का राजनीतिक महत्व भी होता है। सत्ता के केंद्र से बहुत दूर बनाया गया प्रदर्शन स्थल विरोध को सुरक्षित तो बना सकता है, लेकिन उसे अदृश्य भी कर सकता है।
सवाल यह है कि नया स्थान ऐसा होगा जहां आंदोलनकारियों की आवाज सरकार, संसद और मीडिया तक पहुंचेगी या उन्हें शहर के किसी दूरस्थ कोने में भेजकर विरोध को केवल औपचारिकता बना दिया जाएगा? सीजेपी के हालिया आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भारी विवाद हुआ था। अब संगठन जब देशव्यापी संवाद यात्रा की तैयारी कर रहा है, तब प्रदर्शन स्थलों के भविष्य पर शुरू हुई न्यायिक बहस बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी ने चुनावी दल बनने से इनकार जरूर किया है, लेकिन उसका देशव्यापी लिसनिंग टूर उसे एक बड़े युवा जनआंदोलन में बदल सकता है। उधर, जंतर-मंतर का विकल्प तलाशने की प्रक्रिया यह तय करेगी कि भविष्य में असहमति की आवाज सत्ता के दरवाजे तक पहुंचेगी या दिल्ली की सीमाओं से दूर ही रोक दी जाएगी।
आगे क्या होगा?
५-६ अगस्त: छत्रपति संभाजीनगर में सीजेपी की रणनीतिक बैठक।
अगला कदम: देशभर में युवाओं से संवाद के लिए लिसनिंग टूर।
राजनीतिक दल: फिलहाल चुनावी पार्टी बनाने से इनकार।
जंतर-मंतर मामला: सुप्रीम कोर्ट ने केवल जवाब मांगा है,
स्थान बदलने का आदेश नहीं दिया।
