-मनपा के स्मार्ट वॉकवे के दावों की खुली पोल
-फुटपाथों पर कब्जे से पैदल चलना हुआ मुश्किल
द्रुप्ति झा / मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आम नागरिकों के लिए सड़क पर सुरक्षित चलना दिन-ब-दिन चुनौती बनता जा रहा है। एक ओर भ्रष्टाचार और बेलगाम अतिक्रमण ने फुटपाथों और सार्वजनिक रास्तों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है तो दूसरी ओर मनपा स्मार्ट वॉकवे ‘पैदल यात्री सुरक्षा’ और ‘फुटपाथ सुंदरीकरण’ जैसे अभियानों के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। मनपा की लापरवाही के कारण मुंबईकरों को रोजाना जान जोखिम में डालकर सड़कों पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अंधेरी, बांद्रा, दादर, बोरीवली, दहिसर, कुर्ला समेत शहर के कई प्रमुख इलाकों में फुटपाथों पर अवैध फेरीवालों, दुकानों और वाहनों का कब्जा है। नतीजतन, जिन रास्तों का निर्माण पैदल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए किया गया था, वे अब अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं।
फुटपाथों पर कब्जा, सड़कों पर उतरने को मजबूर लोग
मुंबई के अधिकांश इलाकों में फुटपाथ अब पैदल यात्रियों के बजाय अवैध कारोबार और पार्किंग का अड्डा बन गए हैं। कई स्थानों पर फुटपाथ पूरी तरह गायब हो चुके हैं, जबकि कहीं उन पर अवैध दुकानों और ठेलों का कब्जा है। ऐसी स्थिति में बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और दिव्यांग नागरिक तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पर चलने को मजबूर हैं। नागरिक सुविधाओं और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए मनपा ने हेल्पलाइन नंबर, ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप जैसी कई व्यवस्थाएं शुरू की हैं। हालांकि, नागरिकों का आरोप है कि इन प्लेटफॉर्मों पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं होता। दादर निवासी राजन जाधव का कहना है कि उन्होंने फुटपाथों पर अतिक्रमण को लेकर कई बार पोर्टल और नागरिक ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कई मामलों में बिना कार्रवाई किए ही शिकायत का स्टेटस निवारण हो गया दिखाकर टोकन बंद कर दिया गया।
