सामना संवाददाता / प्रयागराज
संगम नगरी में डॉक्टरों की संवेदनहीनता और लापरवाही की एक ऐसी खौफनाक दास्तान सामने आई है, जिसे सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए। नैनी क्षेत्र के एक निजी डॉक्टर की कथित ‘आपराधिक लापरवाही’ के कारण एक महिला का सुहाग उजड़ गया और दो बच्चे अनाथ हो गए।
क्या है मामला?
यमुनानगर औद्योगिक क्षेत्र के तेन्दुआवन ग्राम, पोस्ट नीबी की रहने वाली बबली पाण्डेय ने जिलाधिकारी प्रयागराज को दिए शिकायती पत्र में रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप लगाए हैं। उनके 50 वर्षीय पति सूरज कुमार पाण्डेय का इलाज इस वर्ष फरवरी माह से नई बाजार, नैनी स्थित एक निजी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के डॉक्टर संतोष गुप्ता द्वारा किया जा रहा था। आरोप है कि उक्त डॉक्टर ने बिना किसी पुख्ता मेडिकल टेस्ट या जांच के ही मरीज का टीबी का हैवी ट्रीटमेंट शुरू कर दिया। इससे सूरज पाण्डेय की हालत लगातार बिगड़ती गई। इसके बाद 6 जून 2026 को उनकी पत्नी बबली ने उन्हें शहर के पार्वती हॉस्पिटल में भर्ती कराया। यहाँ भी कोई सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने उन्हें मेदांता, लखनऊ रेफर कर दिया। 8 जून 2026 को मेदांता में सूरज का इलाज शुरू हुआ, लेकिन मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर होने के कारण उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट होती गई।
मल्टीपल ऑर्गन फेल होने से तड़पकर मौत
आरोप है कि गलत दवाओं और भारी डोज के रिएक्शन के कारण मरीज की हालत सुधरने के बजाय और गंभीर हो गई। जब स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई, तो मरीज को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया गया। लेकिन तब तक शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया और अंततः मरीज की मौत हो गई। मृतक ही घर में एकमात्र कमाने वाले थे, जिनकी मौत के बाद परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया है।
मेडिकल बोर्ड गठन की मांग
पीड़िता ने सीधे तौर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, प्रयागराज की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। जिलाधिकारी से गुहार लगाई गई है कि रसूखदार डॉक्टर को बचाने के खेल को रोका जाए और तुरंत एक निष्पक्ष मेडिकल बोर्ड का गठन कर मामले की जांच कराई जाए। साथ ही, दोषी डॉक्टर के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की गई है।
