सामना संवाददाता / मुंबई
मानसून ने अभी पूरी रफ्तार भी नहीं पकड़ी है और मुंबई की सड़कें तालाब बनने लगी हैं। रविवार रात से सोमवार सुबह तक हुई तेज बारिश के बाद अंधेरी सबवे को जलभराव के कारण बंद करना पड़ा। पश्चिमी उपनगरों के कई केंद्रों में महज चार घंटे के भीतर १०० मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज हुई। सड़कों पर पानी भरने से यातायात की गति धीमी पड़ गई और कार्यालय जाने वाले हजारों लोगों को लंबे जाम का सामना करना पड़ा।
यह स्थिति इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि अंधेरी सबवे का डूबना कोई नई घटना नहीं है। मानसून से पहले ३ जून को हुई बारिश में भी इसे बंद करना पड़ा था। पिछले वर्ष यह सबवे कम से कम २७ दिनों में जलभराव से प्रभावित हुआ और ३३ बार यातायात रोकना पड़ा। इसके बावजूद स्थायी समाधान अब भी अध्ययन, सलाहकार और प्रस्तावों तक सीमित है।
मनपा ने मानसून से पहले नालों की सफाई लक्ष्य से अधिक पूरी करने, ५४७ पोर्टेबल पंप लगाने और उनकी ऑनलाइन निगरानी के दावे किए थे। अंधेरी सबवे में ही प्रति घंटे २,५०० घनमीटर पानी निकालने की क्षमता वाले तीन पंप तैनात बताए गए हैं। फिर भी हर तेज बारिश में वही स्थान डूब रहे हैं। इससे प्रश्न उठता है कि समस्या वर्षा की तीव्रता पर है या नालों की क्षमता, अतिक्रमण, गाद, पंप संचालन और ज्वार के बीच तालमेल की विफलता भी जिम्मेदार है।
मुंबई की जल निकासी व्यवस्था का बड़ा हिस्सा लगभग ५५ मिलीमीटर प्रति घंटे तक की बारिश संभालने के लिए बनाया गया है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के दौर में कम समय में अत्यधिक बारिश अब अपवाद नहीं रह गई है। प्रशासन यदि हर बार ‘असाधारण बारिश’ को कारण बताता रहेगा तो इसका अर्थ है कि उसकी योजना वर्तमान मौसम वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं है।
जलभराव केवल यातायात की परेशानी नहीं है। खुले नाले, बिजली के तार, गड्ढे, दीवार गिरने और पानी में फंसे वाहनों से जान का खतरा बढ़ता है। ट्रांस-हार्बर मार्ग पर हाल में पटरी के नीचे की मिट्टी खिसकने से रेल सेवा भी प्रभावित हुई थी।
मनपा और राज्य सरकार को हर जलभराव स्थल का समयबद्ध समाधान, नालों की स्वतंत्र तकनीकी जांच और मानसून खर्च का सार्वजनिक हिसाब देना चाहिए। मुंबईकर हर वर्ष कर देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें बारिश आते ही बंद सबवे, डूबी सड़कें और ठप रफ्तार मिलती है। पहली बारिश में शहर का यह हाल बताता है कि मानसून तैयारी अब भी धरातल से अधिक कागजों पर मजबूत है।
पहली बारिश में लगा घंटों का जाम
मुंबई में मानसून की शुरुआती तेज बारिश ने ही मनपा की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। अंधेरी सबवे फिर जलमग्न हो गया, कई सड़कें तालाब में बदल गर्इं और घंटों ट्रैफिक जाम लगा रहा। करोड़ों रुपए के नाला सफाई और पंपों के दावों के बावजूद शहर की जलनिकासी व्यवस्था पहली ही बारिश में बेबस नजर आई।
