अरुण कुमार गुप्ता
दिल्ली में केजरीवाल की सरकार गए एक साल हो गया और बीजेपी की सरकार आ गई। हजारों करोड़ रुपये के घोटाले सामने आने लगे हैं। कल ही एंटी करप्शन ब्यूरो ने दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में ६०० करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया है। दिल्ली सरकार को दवाइयां और अन्य मेडिकल सामग्री सप्लाई करने के लिए केंद्रीय एजेंसी सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी है, जो डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज के तहत काम करती है। इस एजेंसी का काम कम दाम में दवाइयां खरीदकर अस्पतालों को सप्लाई करना है। यह प्रक्रिया टेंडर के जरिए होती है, ताकि सभी दवा कंपनियां इसमें हिस्सा ले सकें और दाम कम हो सकें, लेकिन घोटालेबाजों ने टेंडर के नियम ऐसे बनाए कि उनकी चहेती कंपनियां ही इसमें भाग ले सकें। एफआईआर के मुताबिक, ओआरएस के पैकेट ५०० प्रतिशत अधिक कीमत पर, रेडियोलॉजी इक्विपमेंट ३४० प्रतिशत अधिक कीमत पर और एक्स-रे मशीन २३० प्रतिशत अधिक कीमत पर खरीदी गई। डेढ़ सौ रुपए की चादर ४५० रुपए में खरीदी गई। अब इस घोटाले में छोटी मछलियों को फंसाया जा रहा है। हेल्थ डिपार्टमेंट की डायरेक्टर जनरल डॉ. वत्सला अग्रवाल और डिप्टी कंट्रोलर नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार करके लोगों की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास किया जा रहा है। अब आप बताइए, क्या एक अफसर बिना नेताओं की मिलीभगत के ६०० करोड़ रुपए का घोटाला करने की हिम्मत कर सकता है? सवाल यह है कि जो ईडी और सीबीआई अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और संजय सिंह को झूठे केस में फंसाकर महीनों जेल में डाल चुकी थीं, वही सीबीआई और ईडी अभी तक मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह के घर क्यों नहीं पहुंचीं? यहां बता दें कि आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं को जिन आरोपों में जेल भेजा गया था, कोर्ट ने कहा कि वे आरोप ट्रायल करने लायक भी नहीं हैं। दिल्ली की जनता अब यही समझे कि भारतीय जनता पार्टी के नेता दिल्ली में सरकार बनाने के लिए इतने बेचैन क्यों थे। क्या उनका मकसद घोटाला ही था?
कब तक सवालों से भागेंगे मोदी जी!
गत दिनों बीबीसी ने ‘एक सवाल, जो आप मोदी जी से करना चाहते हैं’ शीर्षक से पोस्ट किया तो यूजर्स ने सवालों की झड़ी लगा दी। एक यूजर ने पूछा, ‘मोदी जी नॉर्वे के पत्रकार के सवालों से क्यों भागे?’ अगले यूजर ने पूछा, ‘देश छोड़कर कब भागने वाले हैं?’ एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘सवाल पूछने का क्या फायदा, मोदी जी जवाब ही नहीं देते हैं।’ एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘मोदी जी, आपने २०१४ में जो कहा था, ठीक उसका उल्टा हो रहा है। काला धन नहीं आया, रुपया गिर रहा है, महंंगाई बढ़ रही है, बेरोजगारी चारों तरफ है, डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। महिलाओं की सुरक्षा भगवान भरोसे है, राजनीति का अपराधीकरण बढ़ रहा है और सरकार हर मोर्चे पर फेल है। क्या आपको शर्म आई?’ एक अन्य यूजर ने पूछा, ‘मोदी जी, १० रुपए की झालमूड़ी बंगाल के किस कोने में मिलती है?’ दूसरे यूजर ने लिखा, ‘भारत के इतिहास में ऐसा प्रधानमंत्री नहीं हुआ।’ एक अन्य यूजर ने पूछा, ‘१२ साल में एक भी प्रेस कॉन्प्रâेंस क्यों नहीं की? ऑपरेशन सिंदूर में सरेंडर क्यों किया? आपका एपस्टीन फाइल से क्या संबंध है? पेपर लीक क्यों हो रहा है? चुनाव आयोग और मीडिया को गुलाम क्यों बनाया? कब तक अमेरिका से डरते रहेंगे?’ कुछ इस तरह के सवालों की झड़ी यूजर्स ने लगाई। शायद मोदी जी भविष्य में कभी जवाब देने का मन बना लें। अब इसका इंतजार कीजिए।
