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वाराणसी में मीट, मछली एवं मुर्गा की दुकानों को शहर से बाहर करने के विरोध में गैर-भाजपा दलों के साथ लोगों का नगर निगम पर जोरदार प्रदर्शन

उमेश गुप्ता / वाराणसी

वाराणसी नगर निगम द्वारा शहर की मीट, मछली एवं मुर्गा दुकानों को नगर सीमा से 10–15 किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने के निर्णय के विरोध में मंगलवार, 30 जून 2026 को नगर निगम कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया। मीट-मछली बेचकर आजीविका चलाने वाले सैकड़ों महिला-पुरुषों ने सिगरा परिक्षेत्र में मार्च निकालकर नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा।
पैदल मार्च, प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, वामपंथी दलों के साथ ही बनारस के सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मीट-मछली विक्रेताओं के साथ शामिल हुए।
प्रदर्शन में शामिल चौकाघाट मछली मंडी के दिनेश चौहान ने कहा कि नगर निगम का यह फैसला किसी व्यापारिक व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि हजारों छोटे दुकानदारों, कामगारों और उनके परिवारों की आजीविका पर सीधा हमला है।
बनारस में रहने वाले बंगाली समुदाय के एक प्रतिनिधि ने बताया कि मछली की दुकानों को हटाने से शहर के लाखों उपभोक्ताओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। मीट या मछली खरीदने के लिए बनारस के बाशिंदों को कई किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ेगी।
मार्च में पहुंचे शिवपुर मंडी के अवधेश पटेल ने कहा कि स्वच्छता के नाम पर छोटे कारोबारियों को शहर से बाहर किया जा रहा है, जबकि बड़े मॉल, होटल, रेस्टोरेंट और ऑनलाइन कंपनियों पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई जा रही।
लहरतारा मीट मंडी के सुमित सोनकर ने कहा कि यह नीति छोटे व्यापारियों को कमजोर कर बड़े कॉरपोरेट कारोबार को बढ़ावा देने का रास्ता खोलती है।
कांग्रेस की ओर से महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि वाराणसी सदियों से विविध संस्कृतियों, समुदायों और खान-पान की परंपराओं वाला शहर रहा है। किसी एक विचारधारा के आधार पर लोगों की भोजन संबंधी पसंद और रोजगार के अधिकारों पर प्रतिबंध लगाना शहर की बहुसांस्कृतिक पहचान और संविधान की भावना के विपरीत है।
समाजवादी पार्टी के पार्षद हारून ने कहा कि बनारस के सभी लोगों की मांग है कि नगर निगम अपने निर्णय को तत्काल वापस ले। मीट-मछली विक्रेताओं का सर्वे कर उन्हें नियमानुसार लाइसेंस, आवश्यक प्रमाणपत्र, स्वच्छ एवं पक्की दुकानें, कोल्ड स्टोरेज, स्वच्छ पानी, बिजली तथा वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष कैलाश पटेल ने कहा कि मीट-मछली का व्यवसाय करने वालों में बड़ी संख्या सड़क किनारे पटरी पर दुकान लगाने वालों की है। इन्हें स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत पंजीकृत कर वेंडिंग जोन में स्थान दिया जाना चाहिए।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के अजय मुखर्जी ने कहा कि नगर निगम का यह फैसला आजीविका की स्वतंत्रता के साथ-साथ खाने की आजादी का भी हनन करता है।
कार्यक्रम का संचालन नंदलाल मास्टर और संजीव सिंह ने किया।
प्रदर्शन के दौरान “मीट-मछली पर प्रतिबंध का फैसला वापस लो”, “रोजगार करने की छूट दो”, “मीट खाने से परहेज नहीं, तो मीट बेचने पर रोक क्यों”, “व्यवसाय पर रोक नहीं सहेंगे, आजीविका पर चोट नहीं सहेंगे”, “रोजगार पर जो वार करेगा, बनारस उसे माफ नहीं करेगा” तथा “नगर निगम की ये मनमानी, नहीं चलेगी-नहीं चलेगी” जैसे नारों वाली तख्तियां चर्चा का विषय बनी रहीं।

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