मुख्यपृष्ठस्तंभस्कैम्स एंड स्कैंडल्स: राजनीतिक ताबूत में आखिरी कील!

स्कैम्स एंड स्कैंडल्स: राजनीतिक ताबूत में आखिरी कील!

श्रीकिशोर शाही

(बुंगा बुंगा-२३)

सत्ता से बाहर होते ही सिल्वियो बर्लुस्कोनी के सिर से वह राजनीतिक छतरी हमेशा के लिए हट गई, जिसका इस्तेमाल वे खुद को अदालतों से बचाने के लिए करते आ रहे थे। प्रधानमंत्री की कुर्सी छिनने के बाद, उनके खिलाफ बरसों से धूल फांक रही पुरानी कानूनी फाइलें एक-एक करके खुलने लगीं। ‘बुंगा बुंगा’ केस तो चल ही रहा था, लेकिन जिस मामले ने उनके राजनीतिक ताबूत में आखिरी कील ठोंकी, वह सेक्स स्कैंडल्स नहीं, बल्कि उनका पुराना कॉर्पोरेट गोरखधंधा था।
अगस्त २०१३ में, इटली के सर्वोच्च न्यायालय ने बर्लुस्कोनी को अपनी ही मीडिया कंपनी ‘मीडियासेट’ में करोड़ों यूरो की भयंकर टैक्स चोरी का दोषी करार दिया। यह इटली के इतिहास में पहला मौका था जब बर्लुस्कोनी को किसी आपराधिक मामले में अंतिम और पुख्ता तौर पर सजा सुनाई गई थी और अब वे किसी भी कानूनी तिकड़म से बच नहीं सकते थे। अदालत के इस पैâसले के तुरंत बाद, इटली की संसद (सीनेट) ने मतदान करके उन्हें हमेशा के लिए संसद से बाहर फेंक दिया।
इतना ही नहीं, उन पर अगले छह साल तक कोई भी चुनाव लड़ने या सार्वजनिक पद धारण करने पर कड़ा बैन लगा दिया गया। ७७ साल की उम्र में उन्हें चार साल की जेल की सजा सुनाई गई, लेकिन इटली के कानून के तहत अधिक उम्र होने के कारण उन्हें जेल जाने से छूट मिल गई। इसके बजाय, सजा के तौर पर उन्हें मिलान के एक अल्जाइमर देखभाल केंद्र (नर्सिंग होम) में एक साल तक समाज सेवा करने का आदेश दिया गया। जो इंसान कभी दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं के साथ उठता-बैठता था, उसे अब अपनी सजा काटने के लिए बुजुर्गों और बीमारों की देखभाल करनी पड़ रही थी। यह बर्लुस्कोनी के उस सुनहरे और घमंडी युग का एक बेहद शर्मनाक और कानूनी अंत था।
(शेष अगले अंक में)

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