मुख्यपृष्ठसमाचारदो साल से नरक जैसी जिंदगी

दो साल से नरक जैसी जिंदगी

-मंत्री की फटकार भी बेअसर

-वडाला के ७००लॉटरी धारक परिवार म्हाडा को लौटाएंगे फ्लैट

-४५ लाख रुपए चुकाने के बाद भी न पानी, न सुरक्षा, न सड़क

सामना संवाददाता / मुंबई

वडाला के अंटापहिल स्थित म्हाडा की २४ मंजिला के तीन इमारतों में रहनेवाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के करीब ७०० परिवार पिछले दो वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। हालात इतने खराब हैं कि अब इन परिवारों ने अपने फ्लैट म्हाडा को वापस लौटाने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका आरोप है कि एक साल पहले महाराष्ट्र के गृहनिर्माण राज्य मंत्री पंकज भोयर की फटकार और स्पष्ट निर्देश के बावजूद म्हाडा अधिकारी समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं हैं।
अंटापहिल स्थित नूरा बाजार में स्थित म्हाडा फ्लैटों के लिए लोगों ने ४० से ४५ लाख रुपए चुकाए, लेकिन आज भी उन्हें न पर्याप्त पानी मिल रहा है, न पक्की सड़क, न सुरक्षा और न ही साफ-सफाई की सुविधा। शिवसृष्टि हाइट्स हाउसिंग सोसायटी के पदाधिकारियों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में म्हाडा, मनपा, पुलिस और अन्य विभागों को दर्जनों शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। निवासियों का आरोप है कि इमारत के आसपास की झोपड़पट्टी से आने वाले असामाजिक तत्व रोज परिसर में घुसकर नशा करते हैं और विरोध करने पर खुलेआम धमकी देते हैं। कई बार स्थानीय पुलिस से शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से गुंडों के हौसले बुलंद हैं। सुरक्षा दीवार और मुख्य गेट का काम भी आज तक पूरा नहीं हुआ है। इमारत के एक प्रवेश द्वार पर ही एक नेता ने अपना कार्यालय खोलकर उसका कमर्शियल इस्तेमाल कर रहा है, जबकि दूसरे प्रवेश द्वार के इर्द-गिर्द झोप़ड़ावासियों ने अपना अवैध कब्जा कर रखा है। इसके कारण आपदा के समय कोई बड़ी दुर्घटना होने पर न ही फायर ब्रिगेड और न ही एंबुलेंस इमारत में आ पाती है।
मंत्री ने सालभर पहले लगायी थी फटकार
गौरतलब है कि सालभर पहले गृहनिर्माण राज्य मंत्री पंकज भोयर ने मंत्रालय में बैठक बुलाकर म्हाडा अधिकारियों को फटकार लगते हुए तत्काल समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए थे और पुलिस को आपराधिक गतिविधियों पर कार्रवाई करने को कहा था। लेकिन रहिवासियों का आरोप है कि मंत्री के आदेश भी अधिकारियों के लिए बेअसर साबित हुए हैं। इतना ही नहीं, बीते कुछ महीनों से यहां के भाजपा विधायक कैप्टेन सेल्वम तमिल से भी सोसायटी के पदाधिकारियों ने मुलाकात की थी, लेकिन सिर्फ वोट बैंक के चक्कर में विधायक स्थानीय झोपड़ावासियो पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
इमारत की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल
शिर्वेâ कंस्ट्रक्शन द्वारा निर्मित इमारत की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। लगभग हर फ्लैट में लीकेज, टूटते पानी के नल, अग्निशमन पाइपलाइन से रिसाव, बार-बार बंद पड़ने वाली लिफ्ट और कचरे की समस्या से लोग परेशान हैं। रहिवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक आवास नहीं मिला।
परिवारों की चेतावनी
अब ७०० परिवारों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सुरक्षा, सड़क, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो वे म्हाडा को अपने फ्लैट वापस सौंपने और बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उनका कहना है कि घर खरीदकर भी यदि डर और बदहाली में जीना पड़े, तो ऐसे घर का कोई मतलब नहीं है।

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