सुरेश गोलानी / भायंदर
मीरा-भायंदर मेट्रो लाइन-९ के अंतर्गत काशीगांव मेट्रो स्टेशन की सीढ़ियों के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि से संबंधित विरोध और लंबे विवाद के बाद मीरा-भायंदर मनपा ने भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता की पारिवारिक ‘सेवन इलेवन कंपनी’ की स्वामित्व वाली भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गौरतलब है कि लगभग दो दशक पहले निर्मित ४५ मीटर चौड़ी सड़क के लिए इस भूमि के अधिग्रहण हेतु मनपा के नगर रचना विभाग ने १२ मई २०२६ को संपत्ति व्यवस्थापन विभाग को इस प्रस्ताव के बारे में अवगत कराया है। मुआवजे के तौर पर भाजपा विधायक से संबंधित कंपनी को सरकारी दर के आधार पर २४ करोड़ २४ लाख ३३ हजार ३३० रुपए देने की पेशकश की गई है। नगररचना विभाग के सहायक संचालक पुरुषोत्तम शिंदे ने भूमि अधिग्रहण अधिकारी तथा सक्षम पुनर्वसन प्राधिकारी द्वारा जारी निर्देशों का हवाला देते हुए अपने पत्र में ये स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक मूल्यांकन के अनुसार, इस जमीन के लिए मुआवजे की तय कीमत का ३० प्रतिशत (७ करोड़ २७ लाख २९ हजार ९९९ रुपए) तुरंत जमा करने होंगे। सूत्रों के अनुसार, अंतिम मूल्यांकन में मुआवजे की रकम में वृद्धि होने की संभावना है। मनपा की डगमगाती आर्थिक स्थिति को देखते हुए एक जनप्रतिनिधि को जमीन के बदले नकद मुआवजा देने के इस विवादास्पद निर्णय पर नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है।
भेदभाव और दोहरी रणनीति संदेह के घेरे में
४५ मीटर चौड़ी इस मुख्य सड़क का निर्माण लगभग करीब दो दशक पहले हुआ था। हालांकि, इस मार्ग के लिए कई जमीन मालिक प्रभावित हुए थे, लेकिन उनमें से अधिकतर मामलों में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है। ऐसे में मेट्रो परियोजना विवाद के बाद भाजपा विधायक से संबंधित जमीन की अधिग्रहण प्रक्रिया को इतनी तेजी से अमल में लाना और टीडीआर के बजाय करोड़ों के नकद मुआवजे को मंजूरी देना मनपा तथा सरकार की भेदभाव वाली और दोहरी रणनीति को उजागर करता है।
