-सांसदों की खरीद-फरोख्त में उपयोग किए गए पैसे
-विपक्ष का हमला, एकनाथ शिंदे का विभाग जिम्मेदार
-विधानसभा में नासिक स्मार्ट सिटी में एक हजार करोड़ खर्च का मुद्दा उठा
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य में उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नगर विकास विभाग में बड़े पैमाने पर घोटाला शुरू है। नगर विकास विभाग ने राज्य में हजारों करोड़ रुपए के टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) घोटाला किया है और इस घोटाले को महायुति सरकार का संरक्षण प्राप्त है। ऐसा गंभीर आरोप विधानसभा में विपक्ष की ओर से कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने सरकार पर लगाया।
विधानसभा में अनुपूरक मांगों पर चर्चा के दौरान वडेट्टीवार ने महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि मीरा-भायंदर मेट्रो परियोजना में एक सत्तारूढ़ विधायक द्वारा परियोजना का विरोध किए जाने के बाद उससे जुड़ी जमीन के बदले करीब २४ करोड़ रुपए नकद भुगतान का प्रस्ताव सामने आया। ऐसे कई मामले सामने आएंगे, यदि सही तरीके से जांच की जाए।
नकद भुगतान की हो निष्पक्ष जांच
वडेट्टीवार ने कहा कि सामान्यत: ऐसी परियोजनाओं में मुआवजा टीडीआर के रूप में दिया जाता है, लेकिन यदि किसी विधायक को नकद भुगतान किया जा रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि नगर विकास विभाग में बड़े पैमाने पर हजारों करोड़ का टीडीआर घोटाला है और इसके लिए विभाग की जांच कर कार्रवाई तय की जानी चाहिए।
पूरा स्वीकृत बजट खर्च नहीं हुआ, आ गई अतिरिक्त मांग
कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने टीडीआर घोटाले की एसआईटी से जांच कराने की मांग की। कांग्रेस नेता ने नगर विकास विभाग के वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विभाग के लिए पहले से स्वीकृत बजट का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हुआ है, फिर भी सरकार १५ हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त मांग लेकर आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के बजाय केवल आंकड़े बढ़ाकर विकास का दावा किया जा रहा है, जबकि ठेकेदारों के भुगतान लंबित हैं और अनेक परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं।
वडेट्टीवार ने नासिक स्मार्ट सिटी परियोजना को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि इस योजना पर लगभग एक हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए, लेकिन शहर को वास्तविक अर्थों में ‘स्मार्ट’ नहीं बनाया जा सका। उन्होंने नासिक सहित राज्य की सभी स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की। उन्होंने मुंबई महानगरपालिका की निविदा प्रक्रिया, बड़े ठेकों के आवंटन, नगर परिषदों में रिक्त पदों और सार्वजनिक भूमि से जुड़े कथित अनियमित मामलों की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि नगर विकास विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
