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सचिन अहिर गद्दार गुट में शामिल…सब कुछ दिया, फिरभी भागे!.. आदित्य ठाकरे का करारा तंज… रोज तुम्हारी आरती उतारते रहते क्या?

सामना संवाददाता / मुंबई
शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने शिवसेना छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए विधायक सचिन अहिर पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें विधायक बनाया, उप नेता का पद दिया, भारतीय कामगार सेना का महासचिव बनाया और बेस्ट कामगार सेना का अध्यक्ष, उनकी बेटी को प्रभाग समिति और भाई को बेस्ट समिति में सदस्य बनाया। इसके बावजूद, अगर वे पार्टी छोड़कर चले गए, तो आखिर उन्हें और क्या चाहिए था? क्या रोज उनकी आरती उतारते रहते?
शिवसेना ने सम्मान दिया, स्वार्थी लोगों ने पार्टी छोड़ी!
विधान भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा कि पिछले चार वर्षों में उन्होंने देखा है कि जिन लोगों को पार्टी ने सबसे अधिक सम्मान और जिम्मेदारियां दीं, वही अपने स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़कर चले गए।
सचिन अहिर का नाम लिए बिना आदित्य ठाकरे ने कहा कि यह वह व्यक्ति है, जो हमेशा मेरे साथ रहता था। शिवसेना ने उन्हें किसी चीज की कमी नहीं होने दी। ऐसा भी नहीं था कि मुलाकात नहीं होती थी। रोज मिलते थे, रोज साथ में तस्वीरें खिंचती थीं। फिर आखिर आपके लिए और क्या किया जाता? उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़नेवाले नेताओं से शिवसेना को कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि संगठन कार्यकर्ताओं के दम पर आगे बढ़ता है।
आदित्य ठाकरे ने यह भी कहा कि सचिन अहिर ने उन्हें संदेश भेजकर कहा कि वह पार्टी छोड़ने के बाद भी वरली से चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस पर उन्होंने कहा कि ऐसी बातें अक्सर केवल कहने के लिए होती हैं। दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में आदित्य ठाकरे ने कहा कि जो भी उचित कानूनी कार्रवाई होगी, शिवसेना उसे जरूर करेगी। कार्रवाई किये बिना नहीं छोड़ेगी।
राम मंदिर के चढ़ावे की लूट
इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहले राम मंदिर के मुद्दे पर लोगों को सड़कों पर उतारा था, उन आंदोलनों में शिवसैनिक भी शामिल थे। लेकिन आज वही भाजपा राम मंदिर के चढ़ावे की लूट और उससे जुड़े मामलों को लेकर सवालों के घेरे में है।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि आज मेरे मन में एक ही सवाल है कि विधान परिषद के उपसभापति पद पर भाजपा के अपने किसी पुराने कार्यकर्ता को क्यों नहीं बैठाया गया? जो लोग वर्षों से अपना घर-परिवार छोड़कर भाजपा के लिए काम कर रहे हैं, प्रचार कर रहे हैं, उन्हें किनारे कर बाहर से आए लोगों को उनके सिर पर क्यों बैठाया जा रहा है? क्या उन्हें सत्ता से दूर रखा जा रहा है या फिर भाजपा में प्रतिभा की कमी है?

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