मुख्यपृष्ठस्तंभअवधी व्यंग्य: कवि सम्मेलन

अवधी व्यंग्य: कवि सम्मेलन

एड. राजीव मिश्र / मुंबई

गांव मा कवि सम्मेलन के बड़ी जोर-शोर से तैयारी चलि रही है। मंच अइसन सजावा गवा कि जइसे कउनो राजा का दरबार लागि है। पांच बजे के समय दिहे के बाद लगभग छह बजे सम्मेलन शुरू भवा। संचालक एक-एक कबियन के परिचय देवय चालू किये। माता सरस्वती की किरपा अउर परधान जी के घनघोर चापलूसी के दम पर आयोजित यहि अंतर्राष्ट्रीय कबी सम्मेलन में आप सभै गांव वालन के स्वागत अहइ। आज यहि अंतर्राष्ट्रीय कबी सम्मेलन मा दुनिया के कोने-अतरे से अइसन अइसन कबी आएं हैं सबसे आगे कानपुर से धनपत धुआंधार बइठे हैं जेहिके कबीता सुनय के लिए दस-दस हज्जार लोगन के गबरदल होत है, आप सभी लोगन से जोहार बा कि एक बार तालियन के गड़गड़ाहट से इन कर स्वागत किहा जाय। उनके बगल में अद्भुत छंदकार छलछन्द कुमार बइठे हैं इनके छंद से पूरी दुनिया झंड होइ जात है, एक बार जोरदार तालियन से इनका भेलकम किहा जाय। हमरे ठीक बगल मा यहि मंच पे सबसे सुंदर, सुशील, कोमल, मधुर मुस्कान धारी, सबसे नीक सबसे प्यारी, सुकुमारी गीतन के राजकुमारी…जिनके गीत के आगे बड़े बड़न के करेजा पे कीरा लोटि जात है। बिजुरी के तड़पन, जवान दिल के धड़कन, अंखियां के नूर, इतना गोर जइसन कपूर कबीत्री गीतिका गीत जी बइठी हैं। इनके स्वागत में अइसन ताली बजावा कि ई कबीता के उत्सव महोत्सव में बदलि जाय। सबसे पीछे जोककार, हास्यावतार श्री चंद्रकांत चकचोन्हर बइठे हैं जेहिके आगे बड़ी-बड़ी कबीता लजाय जाति है। इनके स्वागत में अगर आप लोगन के ताकत बची होय तो दुइ चार ताली फेकि दिहा जाय। काहें कि ई कबी सम्मेलन के शुरुआत इनहीं के घिसा-पिटा जोक से शुरू होई। इतना सुनतै मंच पे बइठे कबी चकचोन्हर जी उठे अउर माइक के पास पहुंचें अउर माइक के स्टैंड से निकारि के साउंड ऑपरेटर की तरफ लोकाइ दिहे अउर स्टैंड लइके संचालक के दुइ स्टैंड मारें, तब तक दर्शकन की ओर से लेहि जूता, लेहि चप्पल से पूरा मंच भरि गवा अउर एक भव्य अंतर्राष्ट्रीय कबी सम्मेलन के सफलतापूर्वक समापन होइ गवा।

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