मुख्यपृष्ठस्तंभदोनों देशों के बीच हवाई युद्ध का खतरा

दोनों देशों के बीच हवाई युद्ध का खतरा

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर किया पलटवार

पाकिस्तान के हालिया हवाई हमलों के जवाब में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तानी क्षेत्र में हवाई कार्रवाई करने का दावा किया है। अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसके विमानों ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में कथित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। दूसरी ओर पाकिस्तान ने अफगान हवाई हमलों की पुष्टि नहीं की, लेकिन कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने बलूचिस्तान में चार साधारण ड्रोन मार गिराए। दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
यह पलटवार पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में किए गए हमलों के बाद हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पाकिस्तानी कार्रवाई में कम से कम २८ नागरिक मारे गए और ४९ घायल हुए। अफगान अधिकारियों ने मृतकों की संख्या इससे अधिक बताई है, जबकि पाकिस्तान का दावा है कि उसने आतंकवादी ठिकानों और हथियार भंडारों को निशाना बनाया।
दोनों देशों के बीच तनाव की मुख्य जड़ तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी है। इस्लामाबाद का आरोप है कि संगठन के लड़ाके अफगान क्षेत्र से पाकिस्तान में हमले करते हैं और उन्हें तालिबान सरकार का संरक्षण प्राप्त है। काबुल इस आरोप से इनकार करता है और पाकिस्तान पर अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं का दोष अफगानिस्तान पर डालने का आरोप लगाता है।
स्थिति इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि संघर्ष अब सीमा चौकियों और तोपखाने की गोलीबारी से आगे बढ़कर ड्रोन तथा लड़ाकू विमानों तक पहुंच गया है। यदि दोनों देश एक-दूसरे की सीमा में नियमित हवाई हमले करने लगे, तो २,६०० किलोमीटर लंबी सीमा पर व्यापक युद्ध छिड़ सकता है। इससे व्यापारिक मार्ग बंद होंगे, शरणार्थियों की संख्या बढ़ेगी और पहले से कमजोर अफगान अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ेगा।
चीन, सऊदी अरब और अन्य मध्यस्थ देशों के पिछले प्रयास स्थायी संघर्षविराम नहीं करा सके हैं। अब तत्काल आवश्यकता दोनों पक्षों के बीच सैन्य संपर्क तंत्र, स्वतंत्र जांच और आतंकी संगठनों के खिलाफ संयुक्त व्यवस्था की है। अन्यथा आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई के नाम पर शुरू हुआ संघर्ष दो पड़ोसी देशों के खुले हवाई युद्ध में बदल सकता है।
अमेरिका-ईरान समझौता
शांति या अगली लड़ाई से पहले विराम?
अमेरिका और ईरान ने हमले रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु कार्यक्रम तथा प्रतिबंधों पर आगे बातचीत की रूपरेखा बनाई है। लेकिन दोनों पक्ष समझौते के प्रावधानों की अलग-अलग व्याख्या कर रहे हैं। इसलिए विवाद यह है कि यह स्थायी शांति की शुरुआत है या सैन्य दबाव के बीच अस्थायी समझौता।

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