मुख्यपृष्ठस्तंभस्कैम्स एंड स्कैंडल्स: प्लास्टिक सर्जरी और बुढ़ापे की थकान!

स्कैम्स एंड स्कैंडल्स: प्लास्टिक सर्जरी और बुढ़ापे की थकान!

श्रीकिशोर शाही

(बुंगा बुंगा-२४)

राजनीति से बैन होने, अदालतों के चक्कर काटने और बुढ़ापे की मार झेलने के बावजूद, सिल्वियो बर्लुस्कोनी के भीतर की वह आग कभी ठंडी नहीं पड़ी, जिसने उन्हें इटली का सबसे बड़ा नाम बनाया था। एक आम इंसान इन हालात में हार मानकर किसी शांत जगह पर अपना बाकी जीवन बिताता, लेकिन बर्लुस्कोनी आम इंसान नहीं थे। राजनीति उनके लिए महज एक पेशा नहीं, बल्कि खून में बसा एक नशा था, जिसे छोड़े बिना वे जी नहीं सकते थे।
उनका शरीर अब लगातार उनका साथ छोड़ रहा था। २०१६ में उनकी एक बड़ी ओपन-हार्ट सर्जरी हुई, जिसने उन्हें मौत के बेहद करीब ला दिया था। इसके बाद कोविड-१९ ने भी उन्हें बुरी तरह जकड़ लिया और उन्हें कई हफ्तों तक आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझना पड़ा। उनके चेहरे पर अब प्लास्टिक सर्जरी और बुढ़ापे की थकान साफ झलकती थी। लेकिन विला सैन मार्टिनो के एक कमरे में वैâद होने के बावजूद, उनका दिमाग अब भी इटली की राजनीति के मोहरे बिठा रहा था।
राजनीतिक बैन के दौरान भी वे अपनी पार्टी ‘फोर्ज़ा इटालिया’ के निर्विवाद बॉस बने रहे। अपनी हवेली के अंदर से ही वे नेताओं को फोन करते, गठबंधन बनाते और सरकारें गिराने की साजिशें रचते रहे। वे अब चुनाव नहीं लड़ सकते थे, लेकिन वे इटली के एक ऐसे ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाना चाहते थे, जिसके इशारे के बिना रोम में कोई पत्ता न खड़के। शारीरिक बीमारियां, कानूनी पाबंदियां और उम्र का बढ़ता बोझ भी उनकी उस अंधी महत्वाकांक्षा को नहीं मार सका था, जिसने कभी उन्हें एक क्रूज सिंगर से इटली का भगवान बना दिया था। उनकी नजरें अभी भी अपने आखिरी कमबैक (वापसी) पर टिकी हुई थीं।
(शेष अगले अंक में)

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