मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का: मुंबई फिर बेबस!

तड़का: मुंबई फिर बेबस!

कविता श्रीवास्तव

-पानी ने झूठ बहा दिया

मुंबई में बारिश की पहली फुहारों ने ही मुंबई महानगरपालिका की तैयारियों के तमाम दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। मानसून आने से पहले इंतजामों पर करोड़ों रुपए खर्च करने के दावे किए गए थे। कहा गया कि नाले साफ हो गए हैं, जलभराव वाले इलाकों की पहचान कर ली गई है, पंपिंग स्टेशन तैयार है और इस बार मुंबई नहीं रुकेगी, लेकिन तेज बारिश ने कुछ ही घंटों में इन तमाम दावों की हकीकत सामने ला दी और मनपा की पोल खोल दी। पिछले २४ घंटों में मुंबई के कई हिस्सों में १०० मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके बाद अंधेरी सबवे, वडाला, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) और अन्य निचले इलाकों में जलभराव हो गया। कई जगहों पर ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा, जबकि सेंट्रल, वेस्टर्न और हार्बर लाइन की लोकल ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित रहीं। मुंबई के कई इलाकों में सड़कें तालाब बन गईं। कहीं गाड़ियां पानी में फंस गईं, तो कहीं लोगों को कमर तक पानी में चलकर घर और दफ्तर पहुंचना पड़ा। वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे, सांताक्रुज, अंधेरी, वडाला और बीकेसी में घंटों तक ट्रैफिक जाम लगा रहा। दफ्तर जाने वाले, स्कूल के बच्चे, मरीज और रोज कमाने-खाने वाले लोग सबसे ज्यादा परेशान हुए। सबसे बड़ी बात यह है कि इतनी सारी तकलीफों के बाद भी मुंबई अपनी स्टाइल में चल रही है। लोग बर्दाश्त कर रहे हैं और जिम्मेदार लोग अपनी धुन में मस्त हैं। मंगलवार को भारी बारिश में चेंबूर में एक बड़ा पेड़ स्कूल बस पर गिर गया, जिसमें ११ वर्षीय छात्र की मौत हो गई और कई बच्चे घायल हुए। डी.एन. नगर, अंधेरी में पेड़ गिरने से एक बेस्ट बस क्षतिग्रस्त हुई और लंबा जाम लग गया। ईस्टर्न प्रâीवे पर फिसलन और कम दृश्यता के कारण वाहन दुर्घटना भी हुई।
मौसम विभाग ने दिन में मुंबई, ठाणे और पालघर के लिए रेड अलर्ट जारी किया और चेतावनी दी कि अगले कुछ घंटों में अत्यधिक बारिश, तेज हवाएं और समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं। लोगों से समुद्र तटों से दूर रहने और गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की गई है।
अब सवाल है जो हर साल उठता है कि अगर मानसून समय पर आता है, तो तैयारी अधूरी क्यों दिखाई देती हैं? बारिश होते ही सिर्फ सड़कें नहीं डूबतीं हैं, करोड़ों रुपए खर्च होने के दावे भी पानी में बह जाते हैं। हर अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं, निरीक्षण होता है, बयान दिए जाते हैं और जांच के आदेश भी जारी होते हैं, लेकिन मुंबई जैसे देश की आर्थिक राजधानी के लोग सिर्फ इतना चाहते हैं कि पहली ही बारिश में शहर ठप न पड़े। मुंबई हर साल बारिश का सामना करती है और मुंबईकर हर बार हिम्मत भी दिखाते हैं। लेकिन अब वक्त सिर्फ दावों का नहीं, जवाबदेही का है। क्योंकि मुंबई को दावे और दिखावे नहीं, ऐसी व्यवस्था चाहिए जहां बारिश राहत लेकर आए, आफत नहीं।

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