मुख्यपृष्ठस्तंभविशेष: एसआईटी का कार्यकाल बढ़ा चंदा चोरों को बचाने का एक्सटेंशन!

विशेष: एसआईटी का कार्यकाल बढ़ा चंदा चोरों को बचाने का एक्सटेंशन!

-बीजेपी-वीएचपी-आरएसएस के चरित्र पर सवाल

डॉ मंगलेश्वर त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की गहन जांच के लिए १३ जून २०२६ को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी ने २३ जून २०२६ को अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी, जिसमें करोड़ों रुपए की हेराफेरी, नकदी छिपाने और सुरक्षा में सेंध की पुष्टि हुई है।
रिपोर्ट के आधार पर २५ जून २०२६ को मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों के रिश्तेदारों और वैâशियर समेत ८ आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया कि चढ़ावे की रकम को व्यवस्थित तरीके से गायब किया गया और सीसीटीवी फुटेज से भी छेड़छाड़ की कोशिश हुई।
इस घटना के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफों ने मामले को और तूल दे दिया है। श्रद्धालु पूछ रहे हैं कि अगर ट्रस्ट की भूमिका साफ थी तो अध्यक्ष और महासचिव जैसे दो मुख्य पदाधिकारियों ने एक साथ इस्तीफा क्यों दिया? क्या यह इस्तीफा सरकार ने दिलवाया है?
अब यूपी सरकार ने एसआईटी को गहन जांच के लिए १५ दिन का अतिरिक्त समय दिया है। सरकार का कहना है कि वित्तीय लेन-देन और बाकी कड़ियों की जांच बाकी है। पर विपक्ष और श्रद्धालुओं का आरोप है कि यह एक्सटेंशन वीएचपी, बीजेपी और आरएसएस से जुड़े बाकी लोगों को बचाने की कवायद है। सवाल उठ रहा है कि जब ८ गिरफ्तारी हो चुकी है तो बाकी नाम सामने क्यों नहीं आ रहे? आलोचकों का कहना है कि राम मंदिर को सियासी हथियार बनाने वाले संगठन अब चंदा चोरी पर चुप हैं। घर-घर से इकट्ठा किया गया पैसा रामलला तक पहुंचने से पहले ही रास्ते में लूट लिया गया। जब ट्रस्ट के करीबी ही आरोपी निकले तो पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होना लाजिमी है।
जनता की मांग है कि जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो। ट्रस्ट को आरटीआई के दायरे में लाया जाए और चढ़ावे का हर लेन-देन ऑनलाइन सार्वजनिक किया जाए। सिर्फ ८ गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा। जब तक चंदा चोरी का पूरा नेटवर्क बेनकाब नहीं होता और इस्तीफा देने वालों की भूमिका साफ नहीं होती, तब तक ‘रामराज’ का दावा खोखला ही रहेगा। १५ दिन का एक्सटेंशन जांच के लिए है या लीपापोती के लिए, यह आने वाला वक्त बताएगा। फिलहाल श्रद्धालु जवाब मांग रहे हैं: राम के नाम पर जमा पैसा गया कहां?

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