एड. कनई बिस्वास
भाग:३९
धारा ११५, ११६ और ११७
भारतीय न्याय संहिता, २०२३ प्रत्येक व्यक्ति के शरीर और स्वास्थ्य की सुरक्षा को महत्वपूर्ण अधिकार मानती है। किसी व्यक्ति को जानबूझकर चोट पहुंचाना, गंभीर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाने का अपराध करना कानून की दृष्टि में दंडनीय है। अपराध की प्रकृति और चोट की गंभीरता के आधार पर दंड भी अलग-अलग निर्धारित किया गया है। धारा ११५, ११६ और ११७ इन्हीं अपराधों और उनके दंड का प्रावधान करती हैं।
केस स्टडी – १: ‘स्वेच्छा से चोट पहुंचाना’ (धारा ११५)
दो व्यक्तियों के बीच मामूली विवाद हुआ। गुस्से में एक व्यक्ति ने दूसरे को मुक्का मार दिया, जिससे उसे सामान्य चोटें आर्इं और चिकित्सकीय उपचार कराना पड़ा।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी ने जानबूझकर चोट पहुंचाई?
क्या चोट साधारण प्रकृति की थी?
क्या घटना के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं?
पैैâसला – यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने स्वेच्छा से चोट पहुंचाई, तो वह धारा ११५ के अंतर्गत दंड का पात्र होगा। समझें: धारा ११५ के अनुसार किसी व्यक्ति को जानबूझकर साधारण चोट पहुंचाना अपराध है। चोट की प्रकृति, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय दंड निर्धारित करता है।
केस स्टडी – २: ‘गंभीर चोट’ (धारा ११६)
एक व्यक्ति पर लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिससे उसके हाथ की हड्डी टूट गई और उसे लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
अदालत क्या देखेगी?
क्या पीड़ित को भारतीय न्याय संहिता के अनुसार गंभीर चोट पहुंची?
क्या चिकित्सकीय साक्ष्य गंभीर चोट की पुष्टि करते हैं?
क्या चोट आरोपी के कृत्य का प्रत्यक्ष परिणाम थी?
पैâसला – यदि गंभीर चोट सिद्ध हो जाती है तो मामला धारा ११६ के अंतर्गत आएगा। समझें: धारा ११६ गंभीर चोट की कानूनी अवधारणा को स्पष्ट करती है। सामान्य चोट की तुलना में ऐसी चोट, जिसका प्रभाव अधिक गंभीर हो, कानून की दृष्टि में अलग श्रेणी में रखी गई है।
केस स्टडी – ३: ‘स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना’ (धारा ११७)
आपसी रंजिश के चलते एक व्यक्ति ने दूसरे पर धारदार हथियार से हमला कर दिया, जिससे उसकी एक आंख की रोशनी चली गई।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी ने जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाई?
क्या चोट धारा ११६ में वर्णित गंभीर चोट की श्रेणी में आती है?
क्या अभियोजन पक्ष ने अपराध को पर्याप्त साक्ष्यों से सिद्ध किया है?
पैâसला– यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाई है तो वह धारा ११७ के अंतर्गत कठोर दंड का पात्र होगा। समझें: धारा ११७ के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचाता है, तो यह साधारण चोट की अपेक्षा अधिक गंभीर अपराध माना जाता है और इसके लिए अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
भारतीय न्याय संहिता यह स्पष्ट करती है कि किसी व्यक्ति के शरीर को क्षति पहुंचाना केवल व्यक्तिगत विवाद का विषय नहीं, बल्कि कानून के विरुद्ध अपराध है। चोट जितनी गंभीर होगी, अपराध की गंभीरता और दंड भी उतना ही अधिक होगा। इसलिए कानून प्रत्येक व्यक्ति के जीवन और शारीरिक सुरक्षा को समान संरक्षण प्रदान करता है।
(अगले अंक में: धारा ११८, ११९ और १२० – ‘खतरनाक हथियारों या साधनों से चोट पहुंचाना, स्वेच्छा से तेजाब का उपयोग कर गंभीर चोट पहुंचाना तथा गर्भवती स्त्री को गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित अपराध’ को आसान उदाहरणों के साथ समझेंगे।)
