मुख्यपृष्ठनए समाचार‘मोदानी मॉडल' पर फिदा है महायुति!

‘मोदानी मॉडल’ पर फिदा है महायुति!

-मुंबई के भूखंड अडानी को सौंपने की साजिश पर भड़का विपक्ष

रामदिनेश यादव / मुंबई

मुंबई की बहुमूल्य सरकारी और सार्वजनिक जमीनों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर घमासान छिड़ गया है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने महायुति सरकार पर आरोप लगाया है कि शहर की महत्वपूर्ण जमीनों और पुनर्विकास परियोजनाओं को योजनाबद्ध तरीके से एक ही बड़े कॉरपोरेट, ‘अडानी समूह’ के पक्ष में आगे बढ़ाया जा रहा है। विपक्ष ने इसे ‘मोदानी मॉडल’ करार देते हुए सरकार पर कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस का दावा है कि धारावी पुनर्विकास परियोजना से शुरू हुई यह प्रक्रिया अब मुंबई के कई अहम भूखंडों तक पहुंच गई है। धारावी का बेस्ट बस डिपो, मोतीलाल नगर, भारत नगर, मालवणी, देवनार, बांद्रा रिक्लेमेशन और म्हाडा कॉलोनियों के पुनर्विकास जैसे मामलों को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि शहर की सार्वजनिक संपत्तियों और रणनीतिक महत्व वाली जमीनों को धीरे-धीरे निजी कॉरपोरेट नियंत्रण में देने की तैयारी की जा रही है।
धारावी स्थित बेस्ट बस डिपो को लेकर भी कांग्रेस नेता व मुंबई अध्यक्ष वर्षा गायकवाड ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि प्रस्तावित वैकल्पिक व्यवस्था मौजूदा बस संचालन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मुंबई की लगभग हर बड़ी पुनर्विकास परियोजना में एक ही कॉरपोरेट समूह का नाम सामने आना कई सवाल खड़े करता है।
सरकार का अलग राग
हालांकि, राज्य सरकार इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करती रही है। सरकार का कहना है कि सभी परियोजनाएं निर्धारित नियमों, पारदर्शी निविदा प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाई जा रही हैं। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं का उद्देश्य मुंबई के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण, झुग्गी पुनर्विकास और नागरिक सुविधाओं में सुधार करना है।

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