-३० फीसदी मैनहोल में अभी भी नहीं लगी है
-सुरक्षा जाली, दर्जनों चेंबर के कवर गायब
-ठेकेदार और मनपा पर मुंबईकरों का फूटा गुस्सा
द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई की सड़कों पर चलना है तो अपनी जान हथेली पर लेकर चलिए। असल में मॉनसून आते ही मुंबईकरों की जिंदगी पर काल मंडराने लगा है। मुंबई की सड़कों पर इस वक्त जगह-जगह मौत के कुएं खुले हुए हैं। मनपा के बड़े-बड़े दावों की पोल खोल हुई नजर आ रही है। शहर के २,००० से अधिक डेंजरस स्पॉट मानो किसी हादसे को दावत दे रहे हैं। असल में इन जगहों की मैनहोलों पर अब तक सुरक्षा जाली लगाने का काम अधूरा पड़ा है। हाल ही में साकीनाका में एक खुले मैनहोल में ५५ वर्षीय असलम शेख नाम के व्यक्ति की गिरकर मौत हो गई और मामले में शुरुआती जांच के अनुसार, मनपा और चल रहे निजी कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार की लापरवाही सामने आई। बार-बार हो रहे हादसों के बाद अब मुंबई की जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर है और वे मनपा प्रशासन तथा लापरवाह ठेकेदारों पर बेहद आक्रामक हो गए हैं।
हर साल मनपा मानसून से पहले इससे निपटने की सभी व्यवस्था युद्ध स्तर पर करने का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मनपा ने मानसून से पहले सभी संवेदनशील और जलभराव वाले इलाकों के मैनहोलों में सुरक्षा जाली लगाने का वादा किया था। लेकिन ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भी २,००० से ज्यादा मैनहोल बिना जाली के खुले या बेहद खतरनाक स्थिति में हैं।
लोगों का फूटा गुस्सा
लोगों का आरोप है कि ठेकेदारों को करोड़ों रुपए के टेंडर दिए जाने के बावजूद काम में ढिलाई बरती गई। घटिया क्वालिटी और कछुआ गति से चल रहे काम को लेकर ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग उठ रही है। मुंबईकरों का कहना है कि वॉर्ड स्तर पर अधिकारियों की ढीली निगरानी के कारण ठेकेदार बेलगाम हो चुके हैं। मैनहोल के ढक्कन चोरी होने या टूटने के बाद भी उन्हें हफ्तों तक बदला नहीं जाता।
भारी बारिश में मुसीबत
मनपा ने जून २०२६ में कोर्ट को सूचित किया कि मुंबई के ७०,००० से अधिक मैनहोलों के नीचे सुरक्षात्मक लोहे की ग्रिल लगा दी गई हैं, ताकि ढक्कन खुला होने पर भी कोई अंदर न गिरे। हालांकि, अभी भी ३० फीसदी से अधिक मैनहोलों पर यह काम पूरा होना बाकी है। भारी बारिश और जलभराव के दौरान अक्सर मैनहोल के ढक्कन हट जाते हैं, जिससे जानलेवा दुर्घटनाएं होती हैं।
