मुख्यपृष्ठनए समाचारजेन-जी को ‘भोंदू’ बना रहा है एआई!

जेन-जी को ‘भोंदू’ बना रहा है एआई!

-मां-बाप से कम है बच्चों का आईक्यू लेवल

-न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. जारेड कूने का निष्कर्ष

सामना संवाददाता / मुंबई

आज की जेन-जी ऐसी पहली जनरेशन है, जिसका आईक्यू अपने पैरेंट्स की तुलना में कम है। दुनिया के टॉप न्यूरोसाइंटिस्ट में से एक डॉक्टर जारेड कूने होरवाथ का कहना है कि १९९७-२०१० के बीच पैदा हुई जनरेशन ऐसी पहली जनरेशन बन गई है, जिसने एकेडमिक्स में अपने पैरेंट्स से खराब प्रदर्शन किया है। उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी पर ज्यादा निर्भरता के कारण यह हाल हुआ है। इससे भी चिंताजनक यह है कि कई इस जनरेशन के लोगों को लगता है कि वो बहुत स्मार्ट हैं। सोशल मीडिया और एआई जैसी टेक्नोलॉजी को इसके पीछे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
पिछले कई दशकों से कॉग्नेटिव डेवलपमेंट पर नजर रखी जा रही है। इसमें पहली बार जेन-जी को लेकर ऐसा हुआ है, जब उन्होंने बेसिक अटेंशन, मेमोरी, लिट्रेसी, मैथ्स स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी और जनरल आईक्यू के मामले में अपने से पहली जनरेशन के मुकाबले खराब प्रदर्शन किया है। यह तब है, जब बच्चे २०वीं सदी के बच्चों के मुकाबले ज्यादा समय स्कूल में रह रहे हैं। होरवाथ का कहना है कि ऐसा एजुकेशन टेक्नोलॉजी के कारण हो रहा है। अब टैबलेट और कंप्यूटर आम हो गए हैं और रियल लर्निंग के लिए जगह नहीं बची है। स्टूडेंट्स घंटों तक टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर वीडियो स्क्रॉल करते रहते हैं। अब वो किताबें पढ़ने की जगह शॉर्ट वीडियोज में ही उनकी समरी देख रहे हैं।
याद रखने की जरूरत खत्म
अब जब हर सवाल का जवाब एक प्रॉम्प्ट दूर है तो याद रखने और सोचने की जरूरत धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। हालांकि, इसके पीछे जेन-जी को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
एआई ने ऐसे डाला असर
जेन-जी ऐसी पहली जनरेशन है, जो मानव इतिहास की सबसे पावरफुल मानी जा रही है। एआई टेक्नोलॉजी के दौर में जी रही है। एक प्रॉम्प्ट पर एआई एक्सप्लेन, वैâलकुलैट, समराइज, डिजाइन और कोडिंग कर सकती है। रीजनिंग के मामले में भी यह सुपरफास्ट है। ये सारी चीजें आज से १० साल पहले तक कल्पना लगती थीं।

अन्य समाचार