सुनील ओसवाल / मुंबई
देशभर में मतदाता सूचियों को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए चलाए जा रहे एसआईआर अभियान पर नई मुंबई से गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। ऐरोली-बेलापुर विधानसभा क्षेत्र में ऑनलाइन मैपिंग के दौरान आधिकारिक डेटा में कथित तौर पर हेरफेर कर कार्य प्रगति को वास्तविकता से कहीं अधिक दिखाए जाने का मामला सामने आया है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ प्रशासनिक अनियमितता नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल होगा।
मिली जानकारी के अनुसार, ऐरोली क्षेत्र में तैनात एक अधिकारी पर महिला बीएलओ कर्मियों पर दबाव बनाकर आधिकारिक सॉफ्टवेयर का गोपनीय ओटीपी अपने कब्जे में लेने का आरोप है। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद सिस्टम में लॉगिन कर वास्तविक प्रगति केवल १० से २० प्रतिशत होने के बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड में उसे सीधे ५० प्रतिशत तक दर्शाया गया। इस कथित डेटा हेरफेर से एसआईआर अभियान की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मतदाता सूची तैयार करने के शुरुआती चरण में ही डिजिटल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ होती है तो भविष्य में पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
नई मुंबई मनपा ने इस कार्य के लिए निजी शिक्षकों, आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सेविकाओं को बीएलओ के रूप में नियुक्त किया है। लेकिन अब इन्हीं कर्मियों के ओटीपी और डिजिटल पहुंच के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आने से चुनावी डेटा की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
पारदर्शिता को लेकर छि़ड़ी बहस
अब निगाहें संबंधित मतदाता पंजीकरण अधिकारी के स्पष्टीकरण और चुनाव आयोग की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर में चल रहे मतदाता पुनरीक्षण अभियान की पारदर्शिता पर भी व्यापक बहस छेड़ सकता है।
