सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में एक ओर भारी बारिश के बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अस्पताल में भर्ती होकर भी प्रशासनिक कामकाज पर नजर बनाए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर उनके दल के सांसदों के बीच रार यानी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, संभावित मंत्रिपदों को लेकर वरिष्ठता, संगठन के प्रति निष्ठा और दल में शामिल होने के समय को लेकर अंदरूनी खींचतान अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में दल को प्रतिनिधित्व मिलने की स्थिति में उन सांसदों को प्राथमिकता दिए जाने पर मंथन चल रहा है, जो लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े रहे हैं। ऐसे में हाल में दल का दामन थामने वाले कुछ सांसदों के सामने वरिष्ठता सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। इन्हीं कारणों से कुछ नामों को फिलहाल प्रतीक्षा सूची में रखे जाने की चर्चा राजनीतिक हलकों में है।
सूत्रों के अनुसार, देर से हुए दल परिवर्तन का असर अब संभावित मंत्री पद की दौड़ में भी दिखाई देने लगा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल संसदीय संख्या ही नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में निभाई गई भूमिका और संगठन के साथ निरंतर जुड़ाव भी नेतृत्व के पैâसले में अहम कारक हो सकते हैं।
इसी बीच, वरिष्ठ सांसदों के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वरिष्ठता और संगठनात्मक योगदान को प्राथमिकता देने का संदेश देकर नेतृत्व भविष्य की आंतरिक अनुशासन व्यवस्था भी मजबूत करना चाहता है।
अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व पर
हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर होना है। लेकिन संभावित सूची को लेकर जारी अटकलों ने दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी हैं।
