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भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि पर बच्चों ने की लोक गायकी की प्रस्तुति…पद्मश्री तीजन बाई को दी गई श्रद्धांजलि

अनिल मिश्र / पटना

बिहार सरकार, शिक्षा विभाग की संस्था किलकारी बिहार बाल भवन, गया जी में लोक संस्कृति की दो महान विभूतियों तीजन बाई एवं भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किलकारी के बच्चों ने दोनों महान कलाकारों के लोकगीत, रंग-संगीत एवं पंडवानी शैली की प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।इस कार्यक्रम का शुभारंभ दोनों महान विभूतियों के स्मरण में 2 मिनट मौन अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक श्री राजीव रंजन श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि “तीजन बाई और भिखारी ठाकुर भारतीय लोककला की ऐसी अमूल्य धरोहर हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और संघर्ष के बल पर लोक संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। नई पीढ़ी को उनके जीवन, विचार और कला से प्रेरणा लेकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए।”कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी श्री आकाश कुमार ने बच्चों को दोनों महान कलाकारों के संघर्षपूर्ण जीवन से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि “संसाधनों की कमी कभी भी प्रतिभा की राह में बाधा नहीं बनती। तीजन बाई और भिखारी ठाकुर का जीवन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प, निरंतर अभ्यास और अपनी संस्कृति के प्रति समर्पण से असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त की जा सकती हैं। बच्चों को उनके जीवन से सीख लेकर अपने सपनों को साकार करने का प्रयास करना चाहिए।”सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के क्रम में नाट्य प्रशिक्षक नंदकिशोर एवं उनकी टीम ने भिखारी ठाकुर की चर्चित लोकनाट्य परंपरा की झलक प्रस्तुत करते हुए ‘विदेशिया’, ‘प्यारी देश तनी देखे द हमके’, ‘बेटी वियोग’ सहित कई लोकगीतों एवं रंग-संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। कलाकारों के सजीव अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को भोजपुरी लोक संस्कृति की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया।वहीं संगीत प्रशिक्षिका श्वेता कुमारी एवं तबला प्रशिक्षक दिनेश महुआर ने बच्चों के साथ मिलकर तीजन बाई की प्रसिद्ध पंडवानी शैली पर आधारित अनेक गीतों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। बच्चों की मधुर गायन शैली और पारंपरिक संगीत ने उपस्थित सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।इस कार्यक्रम में किलकारी बिहार बाल भवन, गया के सभी प्रशिक्षक, कर्मी, बच्चे एवं बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। सभी ने लोककला की इन महान विभूतियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके आदर्शों एवं सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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