-मानखुर्द में बेस्ट बस हादसा, १ की मौत १० घायल
-यात्रियों के लिए काल बन रहीं बेस्ट बसें
द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबईकरों की दूसरी लाइफलाइन मानी जाने वाली बेस्ट की बसें अब रफ्तार की सनक में सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रही हैं। बेस्ट बसों का सफर अब यात्रियों के लिए जानलेवा साबित होने लगा है। सड़कों पर दौड़ती बेस्ट बसों से आए दिन हो रहे हादसों के बावजूद प्रशासन पूरी तरह मौन और लापरवाह बना हुआ है। सोमवार सुबह मानखुर्द में एक और भीषण हादसा हो गया, जहां एक बेकाबू बेस्ट बस अनियंत्रित होकर सीधे डिवाइडर से जा टकराई। इस दर्दनाक हादसे में १ यात्री की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि १० लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
बता दें कि यह खौफनाक हादसा सायन-पनवेल हाइवे पर मानखुर्द स्थित विश्वकर्मा हॉस्पिटल के ठीक सामने सुबह करीब ९:१४ बजे हुआ। रूट नंबर ५०१ की बेस्ट बस बेहद तेज रफ्तार में जा रही थी। अचानक ड्राइवर ने बस पर से अपना नियंत्रण खो दिया और रफ्तार का कहर बरपाती हुई डिवाइडर में जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि जहां बस के परखच्चे उड़ गए वहीं भीतर मौजूद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को पास के अस्पतालों में ले जाया गया। ८ घायलों का इलाज गोवंडी के शताब्दी अस्पताल में चल रहा है, जबकि गंभीर रूप से चोटिल बस के ड्राइवर और कंडक्टर को इलाज के लिए राजावाड़ी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
क्या जांच के नाम पर होती रहेगी खानापूर्ति
बेस्ट समिति की अध्यक्ष तृष्णा विश्वासराव ने कहा कि मानखुर्द हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। प्रथम दृष्टया दुर्घटना का कारण तेज रफ्तार ही नजर आ रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि बेस्ट बसों के आए दिन दुर्घटनाग्रस्त होने और आम नागरिकों की जान जाने के बाद भी प्रशासन केवल आंतरिक जांच का ढोंग रचकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। मानखुर्द हादसे के बाद भी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और बेस्ट प्रशासन ने फिर से एक आंतरिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
ओवरस्पीडिंग बनी बेस्ट बस हादसे का कारण
अस्पताल में भर्ती घायलों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि ड्राइवर बस को बहुत तेज और लापरवाही से चला रहा था। बार-बार चेतावनी देने के बाद भी रफ्तार कम नहीं की। जिसके कारण यह हादसा हुआ। इस चालक की पहले भी शिकायतें आ चुकी थीं। इस पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है। शहर के अलग-अलग कोनों में लगातार हो रही दुर्घटनाएं इस बात का सबूत हैं कि बेस्ट बसों की स्पीड पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। ओवरस्पीडिंग, खराब मेंटेनेंस और अप्रशिक्षित चालकों के भरोसे दौड़ रहीं ये बसें कई मासूमों की जिंदगी को रौंद रही हैं।
