जो इतिहास बनते हैं,
वे अपने बारे में लिखते नहीं।
जो कलम तोड़ इतिहास लिखते हैं,
वे समय विशेष में होते नहीं।
सत्य कपूर की तरह
वायु में विलीन हो जाता है।
मात्र घटनाओं को सुनकर
पिरोया जाता है,
खंगाला नहीं जाता।
मानना और होना करीब की बात है।
न मानो तो होना भी
न होने जैसा ही होता है।
समय वस्तुओं, घटनाओं को
स्वयं नष्ट कर देता है।
घटनाएं गुत्थमगुत्था होकर
समय को नष्ट-भ्रष्ट कर देती हैं।
उम्रदराजी मांगी तो न थी,
खैरात में मिल गई।
देने वाला देकर भूल गया।
पूछता तो एक बार,
उम्र के इस पड़ाव में हाल कैसा है।
सबके हाथों में छोटा या बड़ा
तमन्नाओं का गुलदस्ता होता है,
जो खिलता है, मुरझाता है,
कभी-कभी चुभ भी जाता है।
बेला विरदी।
