-मुंबई में जुटेंगी साहित्य, सिनेमा और राजनीति जगत की दिग्गज हस्तियां
सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदी साहित्य और भारतीय फिल्म संगीत को अपनी कालजयी रचनाओं से समृद्ध करने वाले पद्मभूषण महाकवि गोपालदास ‘नीरज’ की आठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर 23 जुलाई को मुंबई के रंग शारदा ऑडिटोरियम, बांद्रा-पश्चिम में भव्य संगीतमय कार्यक्रम “कारवाँ गीतों का…नीरज” आयोजित किया जाएगा। भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क एवं महाकवि गोपालदास नीरज फाउंडेशन ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में होने वाला यह कार्यक्रम शाम 6:45 बजे से आरंभ होगा।
महाकवि नीरज हिंदी कविता के उन विरले रचनाकारों में रहे, जिन्होंने साहित्य और सिनेमा के बीच एक अद्भुत सेतु बनाया। “कारवाँ गुजर गया, गुबार देखते रहे”, “फूलों के रंग से”, “शोखियों में घोला जाए”, “ए भाई जरा देख के चलो” और “लिखे जो खत तुझे” जैसे अमर गीत आज भी करोड़ों लोगों की जुबान पर हैं। उनकी कविताओं में प्रेम, मानवीय संवेदनाएं, राष्ट्रभाव और जीवन-दर्शन का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। उन्हें पद्मभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था।
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में नीरज जी के अमर गीतों की संगीतमय प्रस्तुतियां, उनकी कविताओं का पाठ, जीवन से जुड़े दुर्लभ संस्मरण, अनसुने प्रसंग तथा विशेष मंचीय प्रस्तुतियां होंगी, जो दर्शकों को हिंदी साहित्य और फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर की यादों से रू-बरू कराएंगी।
इस सांस्कृतिक संध्या में साहित्य, सिनेमा, पत्रकारिता और राजनीति जगत की कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना है। आमंत्रित अतिथियों में प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर, फिल्म निर्माता बोनी कपूर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय सहित अनेक गणमान्य अतिथियों को आमंत्रित किया गया है।
कार्यक्रम का संयोजन महाकवि नीरज के सुपुत्र मृगांक प्रभाकर कर रहे हैं। उन्होंने देशभर के साहित्य प्रेमियों, कलाकारों और संगीत रसिकों से इस सांस्कृतिक आयोजन में शामिल होकर महाकवि नीरज को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने का आह्वान किया है।
आयोजकों का कहना है कि “कारवाँ गीतों का… नीरज” केवल एक संगीत कार्यक्रम नहीं, बल्कि हिंदी भाषा, साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के उस उज्ज्वल अध्याय का उत्सव है, जिसे महाकवि गोपालदास ‘नीरज’ ने अपनी लेखनी और गीतों से अमर बना दिया। यह आयोजन नई पीढ़ी को नीरज जी के साहित्यिक अवदान से जोड़ने और उनकी अमूल्य विरासत को आगे बढ़ाने का एक सार्थक प्रयास होगा।
