के. जे. सोमैया स्कूल ऑफ लंग्वेजेस एंड लिटरेचर, सोमैया विद्याविहार यूनिवर्सिटी की ओर से 24 एवं 25 जुलाई को दो दिवसीय राष्ट्रीय बहुभाषी संगोष्ठी तथा ‘लेखक-अनुवादक संवाद’ का आयोजन किया जाएगा। संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘समकालीन साहित्य : नए संदर्भ’ रखा गया है। कार्यक्रम का उद्घाटन 24 जुलाई को प्रातः 10:30 बजे सोमैया विद्याविहार परिसर स्थित श्रीमती एस. के. सोमैया जूनियर कॉलेज ऑफ एजुकेशन के सभागार में होगा। मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात लेखिका एवं कहानीकार डॉ. सूर्यबाला उपस्थित रहेंगी। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजय कपूर, कुलसचिव डॉ. नंदकुमार गिलके सहित देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले साहित्यकार, कवि, आलोचक एवं अनुवादक भाग लेंगे।
आयोजन समिति के अनुसार, वर्ष 1990 के उदारीकरण, भूमंडलीकरण और डिजिटल क्रांति के बाद साहित्य की दिशा और दशा में व्यापक परिवर्तन आया है। वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने भाषा शिक्षण, अनुवाद और रचनात्मक लेखन के पारंपरिक तरीकों को भी प्रभावित किया है। इसी परिप्रेक्ष्य में संगोष्ठी का उद्देश्य डिजिटल युग में बहुभाषी संचार, साहित्य में बहुलता (दलित, स्त्रीवादी, आदिवासी एवं प्रवासी स्वर) तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर गंभीर विमर्श के लिए एक सशक्त मंच उपलब्ध कराना है।
संगोष्ठी में अंग्रेजी, हिन्दी, मराठी और गुजराती भाषाओं में लिखे गए शोध-पत्रों का वाचन होगा। साथ ही अनुवाद अध्ययन, पर्यावरण साहित्य, लोक विरासत और डिजिटल साहित्य जैसे विषयों पर केंद्रित शोध-पत्र भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
दो दिवसीय आयोजन के दौरान विभिन्न सत्रों में ‘दस्तखत की मुहर’, ‘चिंबोरे युद्ध’, ‘एक रोटी तीन चूल्हे’, ‘मुंबई… बंबई… बॉम्बे’, ‘व्हील चेअरवर लोकशाही’ तथा ‘माधव कौशिक यांची निवडक कविता’ जैसी चर्चित एवं अनूदित कृतियों का लोकार्पण तथा उन पर परिचर्चा होगी। इसके साथ ही लेखक-अनुवादक संवाद का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अरुण सिंह, वरिष्ठ कवि नरेंद्र पुंडरीक, डॉ. कुसुमलता सिंह सहित कई प्रतिष्ठित साहित्यकार अपने विचार रखेंगे।
संगोष्ठी की निमंत्रक एवं संस्था की निदेशक प्रो. डॉ. वीणा सानेकर तथा समन्वयक डॉ. आनंद बोधले ने बताया कि कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
