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राष्ट्रीय ध्वज दिवस पर गंगा द्वार पर लहराया तिरंगा, विश्वनाथ धाम में गूंजा ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा’

उमेश गुप्ता / वाराणसी

भारत की आत्मा, शौर्य और बलिदान की अमर पहचान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के अंगीकरण दिवस के अवसर पर बुधवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम का गंगा द्वार ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा’ के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष और एक एकजुट एवं समृद्ध राष्ट्र के लिए जनता की आकांक्षाओं के प्रतीक, पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन किए गए तिरंगे को भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ‘सांसों में तिरंगा है, मेरी जान तिरंगा है, भगवान तिरंगा है, मेरी शान तिरंगा है, अभिमान तिरंगा है’ की गूंज जगत के पालनहार बाबा के धाम और मां गंगा के तट पर चहुंओर गूंजती रही।
कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे राजेश शुक्ला ने कहा कि आज हमारे आन, बान और शान के प्रतीक राष्ट्रध्वज तिरंगे का जन्मदिन है। आज के दिन तिरंगे को उसकी पहचान मिली थी। देश के आजाद होने के बाद संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया था।
उन्होंने कहा कि ‘तिरंगा’ केवल तीन रंगों से बना एक राष्ट्रीय ध्वज नहीं है। यह 140 करोड़ भारतीयों की पहचान, स्वाभिमान और गौरव का प्रतीक है। तिरंगे को देखते ही हर किसी के मन में देशभक्ति की भावना स्वतः जाग उठती है। यह लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने ‘मां भारती’ को आजाद कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। हर बार जब तिरंगा शान से लहराता है, तो यह संदेश देता है कि भारत की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सर्वोपरि है।
आयोजन में प्रमुख रूप से चंद्रशेखर बर्मा, देवव्रत साहू, शालिनी शर्मा, गीतिका वीर्यवंशी, दुष्यंत यादव, कामिनी वर्मा, साक्षी वर्मा, सुमन उपाध्याय और रेशमी सिंह उपस्थित रहीं।

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