मुख्यपृष्ठसमाचार₹1.25 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश

₹1.25 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश

-21 महिलाओं और 11 पुरुषों समेत 32 आरोपी गिरफ्तार

उमेश गुप्ता / वाराणसी

वाराणसी के महमूरगंज में शेयर बाजार में निवेश और मोटे मुनाफे का झांसा देकर ₹1.25 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 21 महिलाओं और 11 पुरुषों समेत कुल 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
शुक्रवार को पेशी के दौरान गिरफ्तार युवतियों ने जमकर हंगामा किया और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। डीसीपी क्राइम नीतू कादयान के समक्ष पेश किए जाने के दौरान युवतियां उग्र हो गईं और आरोप लगाया कि पहले कंपनी ने उन्हें अंधेरे में रखा और अब पुलिस ने उन्हें बेवकूफ बनाकर जबरन कागजों पर हस्ताक्षर करवाए हैं।
युवतियों का आरोप था कि उनका चयन एचआर अर्चना सिंह के माध्यम से हुआ था। उन्हें सिर्फ डाटा देकर एसआईपी और स्टॉक्स के बारे में जानकारी देने को कहा गया था। उन्हें सेबी का एक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया गया था, जिसे वे ग्राहकों को बताते थे। युवतियों ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि कंपनी फर्जी है। आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने उन्हें सही जानकारी नहीं दी और कागजों पर जबरन हस्ताक्षर करा लिए।
जब डीसीपी ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने कंपनी के सेबी से पंजीकृत होने की जांच की थी, तो युवतियों ने कहा कि अगर उन्हें इतनी जानकारी होती तो वे 8 से 10 हजार रुपये की नौकरी के लिए वहां काम करने नहीं जातीं।
डीसीपी क्राइम नीतू कादयान ने बताया कि साइबर थाने में मिली शिकायत और स्थानीय इनपुट के आधार पर महमूरगंज स्थित एक रिहायशी इमारत में छापेमारी की गई थी।
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह ‘एन.के.डी. एंड एसोसिएट्स’ के नाम से फर्जी तरीके से कार्यालय चला रहा था। जांच में सामने आया कि यहां काम करने वाले अधिकांश युवक-युवतियां वाराणसी, मिर्जापुर और चंदौली के रहने वाले हैं, जिन्हें 8 हजार रुपये से 16 हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन पर रखा गया था।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के पास से बड़ी संख्या में म्यूल अकाउंट्स और कूट रचित दस्तावेज बरामद किए गए हैं। हंगामे और विरोध के बीच पुलिस ने सभी 32 आरोपियों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

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