मुख्यपृष्ठसमाज-संस्कृतियुवाओं के लिए फिलहाल नवाचार और उद्यमिता का स्वर्णिम काल- आलोक पांडे

युवाओं के लिए फिलहाल नवाचार और उद्यमिता का स्वर्णिम काल- आलोक पांडे

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के तीर्थंकर महावीर इन्नोवेशन फाउंडेशन (टीएमआईएफ) की ओर से ‘इन्नोवेशन, स्टार्टअप्स एंड एंटरप्रेन्योरशिप: योर गेटवे टू द स्टार्टअप इकोसिस्टम’ विषय पर एक्सपर्ट टॉक आयोजित
एआईसी आईआईटी दिल्ली के सीईओ आलोक पांडे ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम पर मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय भारत के युवाओं के लिए नवाचार और उद्यमिता का स्वर्णिम काल है। आज भारत विश्व के अग्रणी स्टार्टअप देशों में शामिल है। सरकार नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है, ताकि युवा नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनें।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सफल स्टार्टअप की शुरुआत किसी बड़ी तकनीक से नहीं, बल्कि अपने आसपास की वास्तविक समस्याओं की पहचान कर उनके प्रभावी समाधान विकसित करने से होती है। जो युवा स्थानीय समस्याओं को समझकर उनके समाधान पर कार्य करेंगे, वही भविष्य के सफल उद्यमी बनेंगे। इन्नोवेशन केवल नया विचार देना नहीं है, बल्कि ऐसा समाधान विकसित करना है, जो समाज, उद्योग या आम नागरिकों की किसी वास्तविक समस्या का समाधान कर सके।
उन्होंने विद्यार्थियों को डिजाइन थिंकिंग, प्रॉब्लम आइडेंटिफिकेशन, मार्केट वैलिडेशन, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, कस्टमर डिस्कवरी तथा बिजनेस मॉडल तैयार करने की प्रक्रिया से भी अवगत कराया।
श्री पांडे तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के तीर्थंकर महावीर इन्नोवेशन फाउंडेशन (टीएमआईएफ) की ओर से आयोजित ‘इन्नोवेशन, स्टार्टअप्स एंड एंटरप्रेन्योरशिप : योर गेटवे टू द स्टार्टअप इकोसिस्टम’ विषयक एक्सपर्ट टॉक को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने कृषि, स्वास्थ्य सेवा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शिक्षा, सामाजिक नवाचार तथा तकनीकी समाधान से जुड़े अपने-अपने बिजनेस आइडिया भी प्रस्तुत किए। मुख्य वक्ता ने इन विचारों पर उपयोगी सुझाव दिए।
प्रश्नोत्तरी सत्र में विद्यार्थियों के स्टार्टअप स्थापना, इंक्यूबेशन प्रक्रिया, सरकारी योजनाओं तथा फंडिंग से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देते हुए श्री पांडे ने कहा कि सीड मनी किसी भी स्टार्टअप के प्रारंभिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसका उपयोग प्रोटोटाइप तैयार करने, उत्पाद विकास, बाजार परीक्षण तथा शुरुआती संचालन संबंधी गतिविधियों के लिए किया जाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल अच्छा आइडिया पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसकी व्यावहारिक उपयोगिता, समस्या का समाधान, बाजार की आवश्यकता तथा एक मजबूत कार्ययोजना भी आवश्यक होती है। किसी भी स्टार्टअप की सफलता के लिए केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि सही टीम, स्पष्ट बिजनेस मॉडल, ग्राहक की आवश्यकताओं की समझ, निरंतर नवाचार तथा प्रभावी क्रियान्वयन भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
श्री पांडे ने केंद्र सरकार की स्टार्टअप्स के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं, जैसे- स्टार्टअप इंडिया, सीड फंड स्कीम, इंक्यूबेशन सपोर्ट, इन्नोवेशन ग्रांट्स, प्रोटोटाइप फंडिंग, मेंटरशिप सपोर्ट, मार्केट लिंकेज तथा इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक सशक्त इंक्यूबेशन सेंटर किस प्रकार शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को आइडिया से बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एक्सपर्ट टॉक में एसोसिएट डीन (एकेडमिक्स) डॉ. अमित कंसल, इंक्यूबेशन सेंटर की प्रबंधक सुश्री ज्योति मदान, आईआईसी के समन्वयक प्रदीप कुमार वर्मा सहित विभिन्न संकायों के विद्यार्थी, शोधार्थी एवं फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे।

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