सामना संवाददाता / मुंबई
डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों पर हमले के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिंदे गुट के नगरसेवक रमेश म्हात्रे को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने म्हात्रे और अन्य आरोपियों को कल्याण कोर्ट से मिली जमानत पर लगी रोक को आगे भी जारी रखा है। जांच लंबित होने के कारण कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती और आरोपियों को जेल में ही रहना होगा।
रमेश म्हात्रे द्वारा डॉक्टरों पर कथित हमले का वीडियो वायरल होने के बाद ८ जुलाई को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। १४ जुलाई को कल्याण कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ ने १८ जुलाई को इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए जमानत पर रोक लगा दी थी।
उम्र और बीमारी की दलील नहीं आई काम
जमानत के लिए म्हात्रे के वकील ने उनकी उम्र और बीमारी का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट ने वायरल वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि हमले के समय वह २५ वर्षीय युवक की तरह सक्रिय दिखाई दे रहे थे। कोर्ट ने म्हात्रे के आपराधिक रिकॉर्ड का भी जिक्र किया। उनके खिलाफ पहले १८ मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। हालांकि, इनमें से १७ मामलों में वह बरी हो चुके हैं।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि आपने महिलाओं और डॉक्टरों पर हमला किया है। हैरानी है कि वे बच गए। उन्हें कुछ और समय अंदर रहने दीजिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि म्हात्रे सामाजिक कार्य से जुड़े हैं। उनका दायित्व लोगों की सेवा करना है, न कि उन पर हमला करना।
